• सूर्यकांत धस्माना बोले – “उत्तराखंड के महापुरुषों को नजरअंदाज कर अधिवेशन स्थल का नाम रखा गया भगवान बिरसा मुंडा नगर.

देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना ने सोमवार को देहरादून में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सवाल उठाया कि जब पिछले वर्ष कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के लिए परेड ग्राउंड की अनुमति यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि “राजनीतिक सभा के लिए मैदान नहीं दिया जा सकता”, तो अब उसी परेड ग्राउंड को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए कैसे आवंटित कर दिया गया?

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धस्माना ने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से प्रशासन और सरकार की पक्षपातपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल को मना कर दिया गया, जबकि भाजपा की छात्र इकाई को वही मैदान तीन दिनों के कार्यक्रम के लिए दे दिया गया, यह लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।

इसके साथ ही धस्माना ने अधिवेशन स्थल के नामकरण पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अधिवेशन स्थल का नाम “भगवान बिरसा मुंडा नगर” रखा गया है, जबकि बिरसा मुंडा झारखंड के महापुरुष हैं, और उत्तराखंड में अनेकों महान विभूतियां हैं जिनके नाम पर स्थल का नामकरण किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि “वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, श्रीदेव सुमन, तीलू रोतेली, बैरिस्टर मुकुंदी लाल, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे अनेक स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी हैं जिन्होंने राज्य और देश का नाम रोशन किया है।

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धस्माना ने कहा कि अधिवेशन में भाग लेने आने वाले देशभर के प्रतिनिधि यह समझेंगे कि भगवान बिरसा मुंडा का संबंध उत्तराखंड से है, जबकि सच्चाई कुछ और है। उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी दिखाता है बल्कि उत्तराखंड की महान विभूतियों के प्रति अनादर भी है।

धस्माना ने राज्य सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि कांग्रेस की सभा के लिए परेड ग्राउंड अनुपलब्ध कैसे था और अब एबीवीपी को वही मैदान कैसे उपलब्ध करा दिया गया। उन्होंने कहा कि “यह सवाल अब जनता के मन में है और इसका जवाब सरकार को देना ही होगा।”

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