श्रीहरिकोटा/नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया। यह 2026 का भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें मुख्य पेलोड DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह EOS-N1 (कोडनेम: अन्वेषा) शामिल है। इस मिशन में कुल 16 उपग्रह (1 मुख्य + 15 सह-उपग्रह) सफलतापूर्वक सूर्य तुल्यकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit) में स्थापित किए गए हैं।

यह PSLV का 64वां उड़ान मिशन है और पिछले साल (मई 2025 में PSLV-C61 की असफलता के बाद) PSLV की वापसी को चिह्नित करता है। मिशन की अवधि लगभग 1 घंटा 48 मिनट रही, जिसमें सभी चार चरणों ने सामान्य रूप से कार्य किया।

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मुख्य विशेषताएं और महत्व:

अन्वेषा (EOS-N1): DRDO द्वारा विकसित यह ~400 किलोग्राम वजनी हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह सैकड़ों संकीर्ण तरंगदैर्ध्य बैंड्स में पृथ्वी की सतह की इमेजिंग कर सकता है। यह दुश्मन ठिकानों, छिपे हुए सैन्य संसाधनों, सीमा निगरानी, कृषि मूल्यांकन, शहरी मानचित्रण और पर्यावरण निगरानी के लिए अत्यंत उपयोगी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह “आकाश में आंख” की तरह काम करेगा, जिससे छिपकर रहना मुश्किल हो जाएगा।

निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका: इस मिशन में भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियों ने अभूतपूर्व योगदान दिया। हैदराबाद की Dhruva Space ने 7 उपग्रह भेजे, जबकि अन्य स्टार्टअप जैसे OrbitAID (AayulSAT – भारत का पहला ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग डेमो), TakeMe2Space (MOI-1 – AI इमेज लैब), और विभिन्न विश्वविद्यालयों (जैसे Assam Don Bosco University का LACHIT-1) के उपग्रह शामिल हैं।

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अंतरराष्ट्रीय सहयोग: स्पेन, नेपाल, थाईलैंड, ब्राजील, फ्रांस, यूके सहित कई देशों के उपग्रह। स्पेनिश स्टार्टअप का Kestrel Initial Demonstrator (KID) कैप्सूल PSLV के चौथे चरण से अलग होकर नियंत्रित री-एंट्री का प्रदर्शन करेगा, जो दक्षिण प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन करेगा।

ISRO के चेयरमैन और वैज्ञानिकों ने इस सफलता को PSLV की विश्वसनीयता और भारत के बढ़ते कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम की जीत बताया। न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा संचालित यह 9वां डेडिकेटेड कमर्शियल मिशन है।

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