ज्योतिर्मठ। प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर उत्पन्न विवाद ने एक बार फिर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य से जुड़े पुराने विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। इस घटनाक्रम के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे कानूनी और ऐतिहासिक विवाद एक बार फिर प्रासंगिक हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज अपने शिविर से पैदल संगम स्नान के लिए प्रस्थान करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और भारी भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें रोकने का प्रयास किया। इससे मौके पर घंटों तक गतिरोध की स्थिति बनी रही। इस दौरान भक्तों और माघ मेला प्रशासन के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई, जिससे विवाद और गहरा गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने ज्योतिर्मठ की उस लंबी विवादित पृष्ठभूमि को फिर से उजागर कर दिया है, जिसमें दशकों तक ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के बीच गद्दी को लेकर कानूनी संघर्ष चलता रहा। स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के निर्वाण के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक से यह माना जा रहा था कि विवाद शांत हो जाएगा, लेकिन माघ मेले के इस ताजा ‘स्नान विवाद’ ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

 

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