नई दिल्ली: भारत और यूरोपीयन यूनियन (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आखिरकार हस्ताक्षर हो गए हैं। दोनों पक्ष 2007 से इस समझौते पर बातचीत कर रहे थे, जो अब 18 साल बाद सफल रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार देते हुए कहा कि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अभूतपूर्व तालमेल का प्रतीक है।

यह समझौता वैश्विक जीडीपी के लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है। पीएम मोदी ने कहा, “यह समझौता न केवल भारत और यूरोप के बीच व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि दोनों पक्षों के लिए रोजगार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खोलेगा।”

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भारत में क्या-क्या सस्ता होगा? समझौते के तहत भारत में यूरोपीयन यूनियन से आयात होने वाले कई सामानों पर टैरिफ में भारी कमी आएगी। प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • लग्जरी कारें: मर्सिडीज, BMW, ऑडी, पॉर्श जैसी हाई-एंड कारों की कीमतों में कमी आएगी। 15,000 यूरो (लगभग 16.3 लाख रुपये) से अधिक मूल्य वाली कारों पर अब केवल 40 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जो पहले काफी अधिक था।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केमिकल्स, विमान, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और मेटल स्क्रैप भी सस्ते होंगे।
  • शराब: यूरोप से आने वाली प्रीमियम वाइन और स्पिरिट्स की कीमतें भारतीय बाजार में घट सकती हैं।
  • सर्विस सेक्टर में अवसर: आईटी, इंजीनियरिंग, टेलीकॉम, बिजनेस सर्विसेज और अन्य क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों को यूरोपीयन बाजार में बेहतर पहुंच और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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ट्रेड में भारी उछाल की उम्मीद एमके ग्लोबल की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इस FTA के लागू होने के बाद 2031 तक भारत और यूरोपीयन यूनियन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 51 अरब डॉलर (करीब 4.68 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। इससे भारत के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

आंकड़ों में भारत vs यूरोपीयन यूनियन

  • जीडीपी: EU – 20 ट्रिलियन डॉलर | भारत – 4.18 ट्रिलियन डॉलर
  • आबादी: EU – 45 करोड़ | भारत – 140 करोड़
  • निर्यात: EU – 2.9 ट्रिलियन डॉलर | भारत – 824.5 अरब डॉलर
  • आयात: EU – 2.6 ट्रिलियन डॉलर | भारत – 915 अरब डॉलर
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को नई गति देगा। साथ ही, यूरोपीयन कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनेगा।

अब दोनों पक्षों की ओर से समझौते को अपनी संसदों/संस्थाओं से अंतिम मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का कहना है कि यह समझौता भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत पर सामान उपलब्ध कराएगा, जबकि भारतीय निर्यातकों को यूरोप के विशाल बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी।

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