नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। उन्होंने चुनाव आयोग के इस अभियान को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है और कोर्ट से अनुरोध किया है कि 2026 के विधानसभा चुनाव पुरानी मतदाता सूची (2025 वाली) के आधार पर ही कराए जाएं।

ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास से सुबह सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना हुईं। कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ आज इस मामले की सुनवाई कर रही है। ममता बनर्जी ने खुद कोर्ट में पेश होने के साथ-साथ मामले की बहस खुद करने की अनुमति मांगी है। यदि अनुमति मिलती है, तो वे किसी बैठे मुख्यमंत्री के रूप में सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से बहस करने वाली पहली व्यक्ति बन सकती हैं।

यह भी पढ़ें :  चारधाम यात्रा की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी, सोशल मीडिया पर 24×7 निगरानी, भ्रामक खबर फैलाने वालों पर पुलिस द्वारा अब तक 3 FIR दर्ज

ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया मनमानी, अपर्याप्त तैयारी वाली और लाखों योग्य मतदाताओं को वंचित करने वाली है। उन्होंने दावा किया है कि यह अभियान चुनाव आयोग द्वारा समय से पहले और बिना उचित वैधानिक आधार के चलाया जा रहा है, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। याचिका में प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, चुनाव आचरण नियम 1961 और संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला दिया गया है।

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची दिसंबर 2025 में जारी की गई थी, जिसमें 58 लाख से अधिक नामों को हटाया गया है। इनमें मृत्यु, प्रवासन या गैर-उपस्थिति जैसे कारण बताए गए हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है और कहा है कि इससे विशेष रूप से आम लोगों, अल्पसंख्यकों और TMC समर्थकों को नुकसान पहुंच रहा है।

यह भी पढ़ें :  उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, कहा – स्नातकों से सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने का किया आह्वान

सुप्रीम कोर्ट पहले ही तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर चुका है। जनवरी 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए थे कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाली सूची में आए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं, प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और आम लोगों पर अनावश्यक तनाव न डाला जाए। कोर्ट ने सुनवाई केंद्रों को विकेंद्रीकृत करने, लिखित रसीद देने और अधिकृत प्रतिनिधियों की अनुमति जैसे निर्देश जारी किए थे।

यह भी पढ़ें :  सूचना विभाग में पदोन्नति : अर्चना व बद्री चन्द नेगी को बनाया गया उप निदेशक

ममता बनर्जी ने पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर SIR रोकने की मांग की थी और इसे “अमानवीय” बताया था। उन्होंने कहा था कि इस प्रक्रिया से लोगों में डर का माहौल है और कुछ मामलों में मौतें भी हुई हैं। TMC सांसदों और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं के साथ यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चुनाव आयोग ने SIR को मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने की जरूरी प्रक्रिया बताया है। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 तक प्रकाशित होने वाली है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई 2026 में संभावित हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *