गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में बाल एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए डाक्टरों को प्रतिबद्धता के साथ काम करना होगा। बाल एवं मातृ मृत्यु से संबंधित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं को पंजीयन प्रसव से पूर्व होने वाली चार एएनसी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर शत प्रतिशत एंट्री कर हाईरिस्क पंजीयन तथा प्रबंधन पर जोर रहना चाहिए। गर्भवती महिलाओं की संस्थागत डिलीवरी शत प्रतिशत होनी चाहिए। एएनएम के कार्यों की समय-समय पर निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने सीएमओ को सभी सरकारी अस्पतालों में साफ सफाई व्यवस्था पर जोर देने को कहा। डीएम का कहना था कि सभी अस्पतालों में डक्टरों को निर्धारित समय पर तैनात रह कर नागरिकों को चिकित्सा सेवा देनी होगी। जिन अस्पतालों में डाक्टरों की कमी है वहां अन्य अस्पतालों से डाक्टरों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए।

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इस दौरान डीएम ने सीएमओ डा. अभिषेक गुप्ता कोइ जिले  में रेफरल मामलों, हाई-रिस्क प्रेगनेंसी, और स्वास्थ्य सेवाओं (108 एम्बुलेंस) की गुणवत्ता में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा  हाई-रिस्क गर्भावस्था के मामलों की नियमित जांच और समय पर इलाज किया जाना चाहिए। संसाधनों की उपलब्धता, बेहतर प्रसव देखभाल जवाबदेही के साथ गम्भीरतापूर्वक लिया जाना चाहिए। मातृ-शिशु स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग के बीच समन्वय स्थापित होना चाहिए। समुदायिक जागरूकता के तहत मौत के कारणों का पता लगाकर, गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। चिकित्सालयों में मैन पावर बढ़ाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि जहां भी चिकित्सा उपकरणों की आवश्यकता है उनके प्रस्ताव उपलब्ध करवाए जाने चाहिए।

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इस दौरान प्रभारी अधिकारी डॉ पवन पाल,  डॉ. हरीश थपलियाल, डॉ अरुण त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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