नई दिल्ली: अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। इस संकट का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, जहां ऊर्जा आयात, कीमतें, निर्यात और हवाई यात्रा सभी प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका लग सकता है।

तेल आपूर्ति पर सबसे बड़ा खतरा

भारत अपनी कुल क्रूड ऑयल जरूरत का लगभग 90% आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा पर्सियन गल्फ देशों से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से रोजाना वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने हमलों के जवाब में जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया है। ईरानी नौसेना द्वारा जहाजों को रेडियो मैसेज भेजे जा रहे हैं कि “कोई जहाज गुजरने की अनुमति नहीं”। कई ऑयल मेजर्स और ट्रेडिंग कंपनियों ने होर्मुज से क्रूड और फ्यूल शिपमेंट्स सस्पेंड कर दिए हैं।

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यदि यह बंदी लंबी चलती है, तो भारत के लिए तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ब्रेंट क्रूड पहले से ही $72-73 प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि $80 या उससे ऊपर जा सकता है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और अन्य ईंधन महंगे होने की आशंका है, जो महंगाई को बढ़ावा देगी।

सोना-चांदी में रिकॉर्ड उछाल

भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश (safe-haven) की ओर भाग रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड $5,300 प्रति औंस के पार पहुंच गया है, जबकि सिल्वर $93 के करीब है। भारत में भी MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1.60 लाख से ₹1.64 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए हैं, और सिल्वर ₹2.67 लाख प्रति किलो के आसपास। विश्लेषकों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो गोल्ड $6,000 और सिल्वर $100 तक जा सकता है। यह निवेशकों के लिए अच्छा है, लेकिन आम आदमी के लिए महंगाई का बोझ बढ़ाएगा।

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एक्सपोर्ट पर 10% से ज्यादा का खतरा

होर्मुज बंद होने से भारत का निर्यात प्रभावित हो रहा है। भारत का करीब 10% एक्सपोर्ट (मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल्स, फार्मा, टेक्सटाइल आदि) मिडिल ईस्ट और यूरोप-अमेरिका रूट्स से प्रभावित है। जहाजों का रूट लंबा होने से लागत बढ़ेगी और डिलीवरी में देरी होगी। कुछ एक्सपोर्टर्स ने पहले से ही शिपमेंट्स रोक दिए हैं।

फ्लाइट्स कैंसल, एयरलाइंस प्रभावित

मिडिल ईस्ट एयरस्पेस बंद होने से कई देशों (ईरान, इराक, इज़राइल आदि) की उड़ानें प्रभावित हैं। एयर इंडिया ने 1 मार्च को यूरोप, अमेरिका और कनाडा के 28 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसल कर दी हैं, जिसमें दिल्ली-लंदन, मुंबई-न्यूयॉर्क, दिल्ली-टोरंटो आदि शामिल हैं। इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस आदि ने भी मिडिल ईस्ट रूट्स पर सभी उड़ानें सस्पेंड कर दी हैं। कुल मिलाकर भारत से 400+ फ्लाइट्स प्रभावित होने की आशंका है। कई फ्लाइट्स रीरूट हो रही हैं, जिससे समय और ईंधन खर्च बढ़ रहा है।

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सरकार और विशेषज्ञों की चिंता

विदेश मंत्रालय ने ईरान और प्रभावित इलाकों में भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को रूस, अमेरिका और अफ्रीका से वैकल्पिक सप्लाई बढ़ानी होगी, लेकिन होर्मुज बंदी लंबी चली तो चुनौती बड़ी होगी। बाजार विशेषज्ञ सोमवार को स्टॉक मार्केट में गिरावट और वोलेटिलिटी की आशंका जता रहे हैं।

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