​ज्योतिर्मठ। देवभूमि के द्वार कहे जाने वाले ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में इस वर्ष होली का उत्सव एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्वरूप में नजर आया। नगर क्षेत्र के इतिहास में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर एक साझा ‘होली मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संपूर्ण नगर के जनमानस ने एक ही स्थान पर एकत्रित होकर गुलाल उड़ाया। इस महोत्सव के लिए भगवान नृसिंह के पौराणिक मंदिर परिसर को चुना गया, जिसका धार्मिक महत्व बेहद खास है। मान्यताओं के अनुसार, यह वही पावन स्थल है जहाँ भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा हेतु नृसिंह अवतार लेकर अत्याचारी हिरण्यकश्यप का वध किया था और युद्ध के पश्चात अपने रौद्र क्रोध को शांत करने के लिए इसी स्थान पर विराजमान हुए थे। इसी पौराणिक और विजय के प्रतीक स्थल पर स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया। नृसिंह भगवान के जयकारों और पारंपरिक होली गीतों के बीच आयोजित इस मिलन समारोह ने न केवल सामाजिक एकता का संदेश दिया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से भी रूबरू कराया।

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