उत्तरकाशी। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा को लेकर इन दिनों प्रवेश नियमों पर जारी बहस के बीच यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने अपना रुख साफ कर दिया है। समिति ने स्पष्ट कहा है कि यमुनोत्री धाम में आने वाले श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का जाति या धर्म नहीं पूछा जाएगा और सभी का “अतिथि देवो भव” की परंपरा के तहत स्वागत किया जाएगा।

हाल के दिनों में बदरीनाथ धाम, केदारनाथ धाम और गंगोत्री धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर अलग-अलग तरह के प्रस्ताव और नियम चर्चा में रहे हैं। खासतौर पर गंगोत्री में पंचगव्य के साथ प्रवेश जैसी शर्तों ने इस मुद्दे को और गरमा दिया था।

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इन घटनाक्रमों के बीच यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या यमुनोत्री धाम भी इसी तरह के नियम लागू करेगा। हालांकि, यमुनोत्री मंदिर समिति ने मंगलवार को जारी बयान में ऐसे किसी भी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाला हर व्यक्ति श्रद्धा के साथ आता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण और यात्रा से जुड़े निर्णय लेना सरकार का अधिकार क्षेत्र है।

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वहीं, समिति के कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल ने कहा कि यमुनोत्री धाम में “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के अनुरूप सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा। इस बीच राज्य सरकार भी यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए तैयारियों में जुटी है। 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है।

 

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