नई दिल्ली: राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों द्वारा चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए पेश किए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव पर 130 लोकसभा सदस्यों और 63 राज्यसभा सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे।

महाभियोग प्रस्ताव 12 मार्च, 2026 को संसद में लाया गया था और इसमें संविधान के आर्टिकल 324(5), चीफ इलेक्शन कमिश्नर और अन्य इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल से जुड़ी 2023 की एक्ट की धाराओं के साथ जज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के प्रावधानों का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई थी।

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लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, स्पीकर ओम बिरला ने प्रस्ताव को स्वीकार करने से मना करते हुए कहा कि उन्होंने जज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के सेक्शन 3 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग किया। राज्यसभा बुलेटिन में भी सदस्यों को इस प्रस्ताव को खारिज किए जाने की जानकारी दी गई।

इस फैसले पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राज्यसभा के पिछले चेयरमैन के साथ हुई घटनाओं की याद ताजा है, जब विपक्षी सांसदों की याचिका स्वीकार की गई थी। जगरदीप धनखड़ ने पिछले साल जुलाई में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राज्यसभा चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था, और विपक्ष अब भी उस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है।

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