नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि संसद के विशेष सत्र में लाए जाने वाले विधेयकों का असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन न केवल खतरनाक है, बल्कि यह संविधान की भावना के खिलाफ भी हो सकता है।

परिसीमन पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा कोई भी परिसीमन केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना व्यापक सहमति के ऐसा कदम देश के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकता है।

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सरकार पर जल्दबाजी का आरोप

उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह विशेष सत्र में विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार चरम पर है। उनके अनुसार, यह राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति हो सकती है।

महिला आरक्षण पर यू-टर्न का आरोप

सोनिया गांधी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को 2023 में पारित किया गया था, जिसमें महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान है, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की शर्त जोड़ी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अब इस प्रावधान में बदलाव कर 2029 से लागू करने की बात क्यों की जा रही है और इसमें इतनी देरी क्यों हुई।

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जाति जनगणना पर भी सवाल

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना को टालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन इसमें लगातार देरी की गई। उनके मुताबिक, सरकार का यह दावा गलत है कि जाति जनगणना से प्रक्रिया में देरी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार और तेलंगाना में जातीय सर्वेक्षण कम समय में पूरे किए गए हैं।

ऑल पार्टी मीटिंग की मांग

सोनिया गांधी ने बताया कि विपक्ष ने तीन बार सरकार से अनुरोध किया कि चुनाव समाप्त होने के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया।

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