नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है और महिला आरक्षण को इससे जोड़कर लागू करने में देरी कर रही है।

संसद में ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गोगोई ने कहा कि महिला आरक्षण को मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर ही 2029 से लागू किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कांग्रेस पहले भी इस बात पर जोर दे चुकी है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग रखा जाए।

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गोगोई ने याद दिलाया कि सोनिया गांधी ने भी पहले महिला आरक्षण के समर्थन के साथ इसे परिसीमन से न जोड़ने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने उस समय विपक्ष की बात नहीं मानी। उन्होंने कहा कि यदि 2023 में विपक्ष के सुझावों पर ध्यान दिया गया होता, तो महिला आरक्षण पहले ही लागू हो सकता था।

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर असल में परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि परोक्ष रूप से परिसीमन लागू करने की राजनीतिक मंशा को दर्शाता है।”

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उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 करने का आधार क्या है। गोगोई के अनुसार, सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट तर्क नहीं दिया है।

गोगोई ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना देश के संघीय ढांचे और संवैधानिक संतुलन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के जल्द लागू किया जाए।

साथ ही, उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर और असम में हुए परिसीमन के उदाहरण यह दिखाते हैं कि इस प्रक्रिया का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

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गोगोई ने निष्कर्ष में कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए और सरकार को पारदर्शी तरीके से इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।

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