नई दिल्ली : मोदी सरकार के लिए आज लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पर वोटिंग का दिन बेहद चुनौती भरा है। NDA के पास लोकसभा में कुल 293 सांसद हैं, जबकि संवैधानिक संशोधन बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी करीब 360 वोटों की जरूरत है। लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 540 है (कुछ सीटें खाली)। कल बिल पेश करने के प्रस्ताव पर वोटिंग में NDA को 251 वोट मिले थे जबकि 185 विरोध में पड़े, जो संख्या की कमी को साफ दिखाता है।

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सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने के लिए तीन बिल पेश किए हैं – संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026, परिसीमन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन बिल। इनका मकसद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है, जिसके लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है। परिसीमन से लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850 तक हो सकती हैं, लेकिन विपक्ष खासकर दक्षिणी राज्यों (तमिलनाडु, आदि) इसे उत्तर के पक्ष में मानकर विरोध कर रहा है। कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन महिला आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन परिसीमन को अलग करने की मांग कर रहा है।

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राज्यसभा में भी NDA के पास कमी है (142-145 बनाम जरूरी 163)। सरकार YSRCP जैसे दलों से समर्थन या विपक्ष के एब्सटेंशन (अनुपस्थिति/वॉकआउट) की उम्मीद कर रही है, जिससे प्रभावी वोटिंग संख्या घट जाए और 2/3 का आंकड़ा आसान हो सके। कुछ निर्दलीय और छोटे दल भी निर्णायक साबित हो सकते हैं। आधी रात को 2023 के मूल अधिनियम को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है, जो अगर नया बिल फेल हो गया तो बैकअप प्लान के रूप में काम कर सकता है।

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पीएम मोदी ने इसे ‘नारी शक्ति सशक्त भारत’ की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है और विरोध करने वालों को चेतावनी दी है। शाम 4 बजे वोटिंग होने वाली है। पास होने पर यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने वाला बड़ा कदम होगा, लेकिन परिसीमन विवाद से क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक तनाव भी बढ़ सकता है। संसद की कार्यवाही पर सबकी नजर बनी हुई है।

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