बदरीनाथ । ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने चारधाम यात्रा के शुभारंभ पर समस्त सनातन धर्मावलंबियों को शुभकामनाएं दी हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर उन्होंने इसे आध्यात्मिक चेतना का महापर्व बताया।

​भगवान बद्री विशाल की मानव पूजा का प्रारंभ

​शंकराचार्य जी ने कहा कि चारधाम यात्रा का आगाज़ होना हर सनातनी के लिए हर्ष का विषय है। गुरुवार को बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही अब देवताओं के स्थान पर मानवों द्वारा भगवान बद्री विशाल की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। उन्होंने इस अवसर को भक्ति और श्रद्धा के मिलन का प्रतीक बताया।
​तीर्थाटन और पर्यटन में संतुलन आवश्यक

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​उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में महाराज श्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में तीर्थाटन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा:
​”तीर्थाटन को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इस दौरान पर्यटन क्षेत्र की भी अनदेखी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि देवभूमि आने वाले पर्यटक धार्मिक मर्यादाओं और परंपराओं का पूर्णतः पालन करें।”

​अध्यात्म की रक्षा और गौ माता का अभियान

​स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि यदि हमें अपनी सनातनी संस्कृति को सुरक्षित रखना है, तो अध्यात्म पर विशेष बल देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अध्यात्म की अनदेखी की गई, तो हमारी गौरवशाली संस्कृति खतरे में पड़ सकती है। ​साथ ही, उन्होंने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए उनका अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए सजग रहें।

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