गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के देवाल ब्लाॅक के वाण गांव में मां नंदा के भाई लाटू देवता मंदिर के कपाट शुक्रवार को पारंपरिक रीति रिवाजों के बीच आम श्रद्धालुओं के दर्शनों को खुलेंगे।

बताते चलें कि लाटू देवता का सीधा संबंध गढ़वाल और कुमाऊं की अधिष्ठात्री मां नंदा देवी से है। लाटू देवता को श्री नंदादेवी राजजात का रक्षक कहा जाता है। इसके चलते ही नंदा राजजात के मुख्य पड़ाव में लाटू देवता का मंदिर स्थित है। नंदादेवी जब एक दौर में मायके से कैलाश की ओर जा रही थी तो तब लाटू देवता को सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया। लोक कथाओं के अनुसार एक दिन लाटू देवता ने अत्यधिक प्यास के चलते भूलवश नशीले द्रव का सेवन कर उत्पात मचाया। बाद को उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने अपनी जीभ ही काट दी। इसके चलते लाटू देवता की मौन स्वरूप में पूजा की जाती है।

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वाण गांव में स्थित मंदिर के गर्भगृह में लाटू देवता के निशान की पूजा की जाती है। इसके बावजूद इसकी दिव्य उर्जा का सामान्य व्यक्ति का देख पाना संभव नहीं है। इसके चलते ही गर्भगृह में प्रवेश करने वाले पुजारी आंखों में पट्टी बांध कर ही लाटू देवता की पूजा करते हैं। मंदिर में पूजा के दौरान पवित्रता बनाए रखने के लिए मुंह को कपड़े ढका जाता है। मंदिर के गर्भगृह में निर्धारित लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है। इस तरह वाण गांव में लाटू देवता के कपाट खुलने को लोंगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अब शुक्रवार को कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालु लाटू देवता के दर्शनों का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे।

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