• हर सप्ताह 3,500 से 4,000 गुणवत्तापूर्ण चूजों का उत्पादन, अब तक 95 हजार चूजों का वितरण; किसानों को बाजार से दो रुपये कम दर पर मिल रहे ब्रॉयलर चूजे
  • उत्तराखंड की पहली राजकीय ब्रॉयलर हैचरी में 1,200 वेंकॉब-430 पैरेंट ब्रीडर पक्षियों का वैज्ञानिक पालन, आधुनिक तकनीक से तैयार हो रहे स्वस्थ डे-ओल्ड चूजे

टिहरी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार कृषि एवं पशुपालन गतिविधियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना के अंतर्गत स्थापित राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र, छाम किसानों और कुक्कुट पालकों के लिए गुणवत्तापूर्ण ब्रॉयलर चूजों का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। हैचरी में हर सप्ताह करीब 3,500 से 4,000 ब्रॉयलर चूजों का उत्पादन किया जा रहा है। स्थापना के बाद से अब तक करीब 95 हजार चूजों का वितरण राज्य के विभिन्न जिलों के किसानों और कुक्कुट पालकों को किया जा चुका है।

बाजार से दो रुपये कम दर पर मिल रहे गुणवत्तापूर्ण चूजे

जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने बताया कि किसानों को हैचरी में उत्पादित गुणवत्तापूर्ण ब्रॉयलर चूजे बाजार मूल्य से दो रुपये प्रति चूजा कम दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे किसानों को कम लागत में बेहतर गुणवत्ता के चूजे मिल रहे हैं। इससे कुक्कुट पालन की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण चूजों की उपलब्धता होने से किसानों को बाहरी बाजार पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल रही है।

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301.97 लाख की लागत से स्थापित हुई हैचरी

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना के तहत स्थापित राजकीय ब्रॉयलर हैचरी की कुल लागत 301.97 लाख रुपये है। इसमें निर्माण कार्य पर 238.71 लाख रुपये और उपकरणों की स्थापना पर 63.26 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह उत्तराखंड की पहली राजकीय ब्रॉयलर हैचरी है, जहां करीब 1,200 वेंकॉब-430 (Vencobb-430) पैरेंट ब्रीडर पक्षियों का वैज्ञानिक ढंग से पालन किया जा रहा है। आधुनिक सेटर और हैचर मशीनों के माध्यम से अंडों का वैज्ञानिक ऊष्मायन कर उच्च गुणवत्ता वाले डे-ओल्ड ब्रॉयलर चूजों का उत्पादन किया जा रहा है।

कई जिलों के किसानों को मिल रहा लाभ

राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र, छाम से उत्पादित चूजों का वितरण टिहरी गढ़वाल, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। इससे किसानों और कुक्कुट पालकों को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चूजे उपलब्ध हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चूजों की उपलब्धता से परिवहन लागत में भी कमी आ रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों तथा ग्रामीण युवाओं के लिए कुक्कुट पालन को व्यवहारिक स्वरोजगार के रूप में अपनाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

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जैव सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन

प्रभारी अधिकारी राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र, छाम साक्षी बिजल्वाण ने बताया कि प्रक्षेत्र में चूजों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए जैव सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल तथा तापमान और आर्द्रता का वैज्ञानिक नियंत्रण किया जाता है। आधुनिक हैचरी प्रबंधन के माध्यम से स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण चूजों का उत्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता के चूजे उपलब्ध कराने के साथ कुक्कुट पालन में होने वाले जोखिम को कम करने में भी मदद मिल रही है।

पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार का नया विकल्प

राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र, छाम किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की सरकारी पहल का प्रभावी उदाहरण बन रहा है। हैचरी के माध्यम से किसानों को एक ओर किफायती दर पर गुणवत्तापूर्ण चूजे उपलब्ध हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुक्कुट पालन के क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में कम भूमि पर भी कुक्कुट पालन को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। इससे ग्रामीण युवाओं और छोटे किसानों को स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए विकल्प मिल सकते हैं।

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आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य कृषि एवं पशुपालन आधारित गतिविधियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और बाजार की मांग से जोड़कर किसानों एवं पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। छाम की राजकीय ब्रॉयलर हैचरी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

गुणवत्तापूर्ण चूजों की स्थानीय उपलब्धता, कम लागत, आधुनिक तकनीक और किसानों को बाजार से जोड़ने की पहल के माध्यम से यह हैचरी आत्मनिर्भर उत्तराखंड और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रही है।

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