चमोली। चमोली जिले के पीपलकोटी में टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में अचानक मलबा और पानी आने से बड़ा हादसा हो गया। प्रशासन के अनुसार हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं तीन श्रमिकों के लापता होने की सूचना है, जिनकी तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी है। हादसे के बाद परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने भी हादसे को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए निर्माण कार्यों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

टनल में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप

विधायक लखपत बुटोला ने आरोप लगाया कि हादसे के समय टनल के अंदर ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं थी। उन्होंने कहा कि घटना के वक्त टनल में करीब 22 कर्मचारी काम कर रहे थे। उनके मुताबिक, पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर हादसा हो चुका है, इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई। विधायक ने प्रशासन से बचाव अभियान में पूरी ताकत लगाने और टनल में फंसे श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और लापता श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

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करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में आया मलबा और पानी

प्रशासन के मुताबिक विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल की लंबाई करीब तीन किलोमीटर है। हादसे के दौरान टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण अचानक मलबा और पानी आने लगा। इससे टनल के अंदर काम कर रहे कर्मचारी फंस गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की ओर से तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

NDRF, SDRF और ITBP की टीमें रेस्क्यू में जुटीं

टनल के अंदर मलबा और पानी होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें मौके पर तैनात हैं। बचाव दल अत्यंत सावधानी और आपसी समन्वय के साथ मलबा हटाकर टनल के भीतर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

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जिलाधिकारी गौरव कुमार मौके पर मौजूद अधिकारियों और रेस्क्यू टीमों से लगातार जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने शेष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों और तकनीकी सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से घायलों के उपचार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।

दिसंबर 2025 में भी घायल हुए थे 81 श्रमिक

विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना में हादसे का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 30 दिसंबर 2025 को परियोजना में लोको ट्रॉली की टक्कर के कारण बड़ा हादसा हुआ था। उस समय टनल में काम करने के लिए 81 श्रमिकों को लेकर एक लोको ट्रॉली जा रही थी। रास्ते में खड़ी मालवाहक लोको ट्रॉली के अचानक ब्रेक फेल होने से वह आगे खिसक गई और श्रमिकों को ले जा रही ट्रॉली उससे टकरा गई। इस हादसे में सभी 81 श्रमिक घायल हुए थे। घायलों को टनल से बाहर निकालकर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराया गया था।

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सुरक्षा मानकों पर अब उठ रहे सवाल

लगातार हो रहे हादसों के बाद परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मौजूदा हादसे में टनल के अंदर मौजूद श्रमिकों की संख्या को लेकर भी शुरुआती स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आई है। फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान लापता श्रमिकों की तलाश और टनल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों की विस्तृत जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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