मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दिवंगत उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार अपने निधन से ठीक पहले एनसीपी के दोनों गुटों—अपने नेतृत्व वाले गुट और चाचा शरद पवार के गुट का विलय करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। उनके एक करीबी सहयोगी ने बताया कि अजित पवार इस विलय को लेकर बहुत उत्सुक थे और प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। करीबी ने कहा, “अजित दादा ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि वे दोनों गुटों के एक होने के 100% पक्ष में हैं। पूरी तैयारी हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में घोषणा होनी थी।” यह खुलासा अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को बारामती के पास विमान दुर्घटना में मौत के बाद सामने आया है, जिसने महाराष्ट्र की सियासत को हिला कर रख दिया है।

यह भी पढ़ें :  मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सरकारी विद्यालयों में डिजिटल एजुकेशन की दिशा में जिला प्रशासन के कदम तेज, 880 एलईडी टीवी का स्टॉक हुआ तैयार

2023 में अजित पवार ने शरद पवार से अलग होकर पार्टी तोड़ी थी और एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल हो गए थे, जिससे एनसीपी दो गुटों में बंट गई। हाल के महीनों में दोनों गुटों के बीच सुलह के संकेत मिल रहे थे। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों ने संयुक्त उम्मीदवार उतारे थे। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव (5 फरवरी को) के लिए भी ‘घड़ी’ चिन्ह पर मिलकर लड़ा जा रहा था। शरद पवार गुट के नेताओं ने पुष्टि की कि अजित पवार विलय पर चर्चा करने को तैयार थे और स्थानीय चुनावों के बाद फैसला लेने की बात चल रही थी। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 फरवरी को औपचारिक घोषणा का प्लान था।

यह भी पढ़ें :  विधानसभा बजट सत्र की तैयारियों में जुटी चमोली पुलिस 

अजित पवार की मौत ने इन योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि अजित गुट का नेतृत्व कौन संभालेगा—सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल या अन्य? क्या विलय होगा या महायुति गठबंधन में अजित गुट की भूमिका कमजोर पड़ जाएगी? एनसीपी के वरिष्ठ नेता नरहरी झिरवाल ने कहा कि “दोनों गुट पहले से ही एक हैं, बिखरे रहने का कोई मतलब नहीं।” शरद पवार गुट के नेताओं ने भी संकेत दिए कि अजित पवार के साथ बातचीत चल रही थी। विश्लेषकों का मानना है कि यह त्रासदी परिवार को और करीब ला सकती है, लेकिन राजनीतिक गणित (महायुति vs MVA) अब बदल सकता है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि एनसीपी का भविष्य अब परिवार और वरिष्ठ नेताओं के फैसले पर निर्भर है।

यह भी पढ़ें :  जनजाति समाज देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा में बसता है – सीएम धामी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *