Badrinath Dham Opening Date 2026 : उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर इंतजार खत्म हो गया है। देवभूमि के प्रमुख धामों के कपाट खुलने की तिथियों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। इस वर्ष बद्रीनाथ धाम के कपाट पिछले साल की तुलना में 11 दिन पहले खुल रहे हैं। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर नरेंद्र नगर राजमहल में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के बाद तय हुआ कि 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर भगवान बद्री विशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

अक्षय तृतीया पर होगा यात्रा का श्रीगणेश

बद्रीनाथ धाम से पहले, उत्तरकाशी स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ पर्व पर खोले जाएंगे। परंपरा के अनुसार, राजपुरोहितों ने महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री और लग्न गणना के आधार पर इन शुभ मुहूर्तों को अंतिम रूप दिया है। कपाट खुलने के साथ ही हिमालय की गोद में स्थित इन पवित्र धामों में ग्रीष्मकालीन दर्शनों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

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गाडू घड़ा परंपरा और तिल के तेल का महत्व

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया का एक मुख्य हिस्सा ‘गाडू घड़ा’ (कलश) यात्रा है। पौराणिक परंपरा के अनुसार, राजमहल में कुंवारी और सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान बद्री विशाल के अभिषेक के लिए तिल का तेल निकालती हैं। तेल की शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हुए महिलाएं मुंह पर पीला कपड़ा बांधकर इस धार्मिक कार्य को संपन्न करती हैं। इसी पवित्र तेल से पूरे सीजन में भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है।

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उत्सव डोलियों का प्रस्थान कार्यक्रम

धामों के कपाट खुलने से पूर्व मां गंगा और मां यमुना की उत्सव डोलियां अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों से प्रस्थान करेंगी.18 अप्रैल को मुखवा गांव से डोली रवाना होगी, भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद 19 अप्रैल को गंगोत्री पहुंचेगी। 19 अप्रैल की सुबह खरशाली से डोली प्रस्थान करेगी और उसी दिन यमुनोत्री धाम पहुंचकर कपाट खोले जाएंगे।

पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट : नए स्वरूप में दिखेगा बद्रीनाथ

इस बार की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए खास होने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप बद्रीनाथ मास्टर प्लान के तहत धाम का परिसर अब पहले से अधिक भव्य और विस्तृत नजर आ रहा है। करीब 424 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को अप्रैल 2026 तक पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य है। फेज-1 के तहत शेषनेत्र और बद्रीश झील का सौंदर्याकरण और अलकनंदा रिवर फ्रंट का काम लगभग पूरा हो चुका है। फेज-2 में मंदिर परिसर के विस्तार और आधुनिक अस्पताल के निर्माण पर तेजी से काम चल रहा है।

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