उत्तरकाशी: सीमांत विकास खंड मोरी के सुदूरवर्ती दोणी गांव में उत्तराखंड सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” के अंतर्गत एक बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी और उन्होंने घर-द्वार पर सरकारी योजनाओं व सेवाओं का लाभ प्राप्त कर खुशी जाहिर की।
क्षेत्रीय विधायक दुर्गेश्वर लाल की उपस्थिति में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं को आत्मीयता से सुना गया। विभिन्न विभागों के स्टालों पर योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र और सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। कुल 67 शिकायतें/समस्याएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को तत्काल राहत प्रदान की गई।
शिविर के दौरान ग्रामीणों ने सड़क, शिक्षा, पेयजल, विद्युत, संचार, खाद्य आपूर्ति आदि से जुड़ी कई प्रमुख समस्याएं उठाईं। सट्टा निवासी चंद्रमणि रावत ने मसरी पीएमजीएसवाई सड़क से मलबा आने के कारण सेब के पेड़ों को हुए नुकसान पर मुआवजे की मांग की, जिस पर अधिशासी अभियंता ने बताया कि प्रतिकर का प्रस्ताव मुख्य अभियंता को भेजा जा चुका है।
ग्रामीणों ने सिलान नामे तोक में पशुचारा लाने के लिए लकड़ी का पुल बनाने, मसरी एवं खन्यासणी में पेयजल संकट, दोणी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने, सेवा गांव में पंचायत भवन निर्माण, सेवा-बरी से हिमाचल प्रदेश के डोडरा क्वार तक सड़क निर्माण, धौला-दाताधार पैदल मार्ग की मरम्मत, भीतरी-खन्यासणी-सेवा बरी में शिक्षकों की तैनाती, बेनोल-नैटवाड़ बाईपास पर वैली ब्रिज निर्माण, लो वोल्टेज समस्या और खराब ट्रांसफार्मर बदलने जैसी मांगें रखीं।
विधायक दुर्गेश्वर लाल ने कई मुद्दों पर वन विभाग, पीएमजीएसवाई और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि दोला एवं गियांगाड़ में मोटर पुलों के लिए 20 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। सेवा-बरी से डोडरा क्वार सड़क के लिए वन स्वीकृति का प्रस्ताव प्रेषित है और जल्द कार्य शुरू होने की संभावना है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने शिक्षकविहीन स्कूलों (मसरी में 49 और बरी में 40 छात्र होने के बावजूद) में एक मार्च तक शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने समायोजन की प्रक्रिया भी तेज करने को कहा। साथ ही सट्टा गांव में आधार कार्ड, राशन कार्ड और केवाईसी के लिए 26 से 28 फरवरी तक तीन दिवसीय विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की। विद्युत संबंधी शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए गए।
यह शिविर वर्षों से छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लंबी दूरी तय करने वाले ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हुआ। ग्रामीणों के चेहरों पर संतुष्टि की मुस्कान इस अभियान की सफलता का जीता-जागता प्रमाण बनी। उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास दूर-दराज के क्षेत्रों तक सुशासन पहुंचाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
