इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर में सोमवार को एक भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी (एफसी) पैरामिलिट्री फोर्स के मुख्यालय पर सशस्त्र हमलावरों ने घातक हमला बोल दिया। रॉयटर्स के अनुसार, दो सुसाइड बॉम्बरों ने हमले में हिस्सा लिया, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया, “पहले सुसाइड बॉम्बर ने कॉन्स्टेबुलरी के मुख्य द्वार पर हमला किया, जबकि दूसरा हमलावर कंपाउंड के अंदर घुस गया।” हमलावरों ने बंदूकों से भी अंधाधुंध फायरिंग की, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाल लिया।

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घटना की सूचना मिलते ही पाकिस्तानी सेना, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मुख्यालय को पूरी तरह घेर लिया। अधिकारी ने कहा, “हम संदेह कर रहे हैं कि मुख्यालय के अंदर कुछ आतंकवादी अभी भी छिपे हुए हैं। स्थिति को सावधानीपूर्वक संभाला जा रहा है।” इलाके में सड़कों को ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया गया है और आसपास के निवासियों को घरों के अंदर रहने की हिदायत दी गई है।

स्थानीय निवासी सफदर खान ने रॉयटर्स को बताया, “सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है। सड़कें पूरी तरह बंद हैं और माहौल तनावपूर्ण है।” सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विस्फोटों और गोलीबारी की आवाजें साफ सुनाई दे रही हैं।

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यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकी गतिविधियां तेज हो रही हैं। 2025 में अब तक इस प्रांत में 782 से अधिक लोग हिंसा का शिकार हो चुके हैं। हाल ही में क्वेट्टा में एक राजनीतिक रैली पर सुसाइड हमले में 11 लोग मारे गए थे, जबकि मार्च में बालोच लिबरेशन आर्मी ने एक ट्रेन को हाईजैक कर सैनिकों को निशाना बनाया था।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने हमले की जिम्मेदारी किसी समूह पर नहीं बताई है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या उसके सहयोगियों का काम हो सकता है। सेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है और ऑपरेशन जारी रहेगा।

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इस घटना ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर अफगानिस्तान सीमा के नजदीक स्थित पेशावर जैसे संवेदनशील इलाकों में। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हमले की निंदा की है और पाकिस्तान को आतंकी खतरों से निपटने में सहयोग की पेशकश की है।

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