उत्तरकाशी : उत्तराखंड के हर्षिल घाटी में एक नई सुबह का आगाज हुआ है। जहाँ ऊँचे हिमालय की चोटियां बादलों से बातें करती हैं, वहाँ अब एक नन्हा रेडियो स्टेशन सीमांत के आठ गाँवों को देश-दुनिया से जोड़ने लगा है। नाम है इसका – “धुन पहाड़ की” (Ibex Tarana 88.4 MHz)।

सोमवार का वो पल यादगार बन गया जब लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा ने एक स्कूली बालिका के हाथों से रिबन कटवाकर इस सामुदायिक रेडियो स्टेशन का उद्घाटन किया। भारतीय सेना की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत स्थापित यह स्टेशन उपला टकनौर क्षेत्र के उन गांवों के लिए संजीवनी बनकर आया है, जहाँ आज भी मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है और सूचनाएँ पहुँचने में दिन लग जाते थे।

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अब यहाँ मौसम की खबर हो, सरकारी योजना की जानकारी हो, आपदा की चेतावनी हो या स्थानीय लोकगीतों की मिठास, सब कुछ 88.4 मेगाहर्ट्ज़ पर तुरंत पहुंचेगा। कृषि, बागवानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और संस्कृति – हर विषय पर कार्यक्रम होंगे। “हैलो हर्षिल”, “दोपहरी घाम”, “मध्य तरंग” जैसे शो न सिर्फ मनोरंजन करेंगे, बल्कि ग्रामीणों को सशक्त भी बनाएँगे।

ग्रामीणों की आंखों में चमक साफ दिखी। बगोड़ी की ग्राम प्रधान रचिता डोगरा ने कहा, “भारतीय सेना ने हमें वो आवाज़ दी है जो सालों से दबी थी। अब हमारा गाँव भी दुनिया के नक्शे पर चमकेगा।”

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यह सिर्फ एक रेडियो स्टेशन नहीं है। यह सीमांत के उन लोगों की उम्मीद है जो चुपचाप देश की रक्षा करते हैं और खुद को अक्सर भुला दिया जाता है। यह उन बच्चों की मुस्कान है जो अब रेडियो पर अपनी कविता सुन सकेंगे। यह उन मां-बहनों की राहत है जो आपदा के समय अब अकेला महसूस नहीं करेंगी।

सेना पहले ही जोशीमठ, पिथौरागढ़ और हिमाचल के सीमांत क्षेत्रों में ऐसे स्टेशन शुरू कर चुकी है। हर जगह यही सुनाई दिया  “हमारी आवाज़ अब दूर तक जाएगी।”

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