इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से नवाजे जाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल ने बड़ी त्रासदी को जन्म दे दिया है। भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन लीकेज के कारण सीवेज का पानी पीने की पेयजल लाइन में मिलने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। हजारों लोग उल्टी-दस्त और डायरिया की चपेट में आए हैं, जबकि सैकड़ों अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं।

मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी में जानलेवा बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। मुख्य कारण पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में रिसाव बताया जा रहा है, जहां ऊपर बने शौचालय से गंदा पानी मिल गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महीनों से पानी में बदबू और गंदगी की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।

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इस घटना से शहर में सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसे घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता उमा भारती ने भी अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे स्वच्छ शहर में ऐसी घटना शर्मनाक है और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

इस त्रासदी ने इंदौर के सुभाष चौक की करीब 30 साल पुरानी दर्दनाक घटना को फिर से याद दिला दिया है। उस समय भी पानी की टंकी में सड़ी हुई लाश मिलने से लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हुए थे, जिससे खौफ का माहौल बना था। आज भी उस घटना की याद से लोग सिहर उठते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों मामलों में सिस्टम की विफलता ही मुख्य कारण है।

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प्रशासन ने अब कार्रवाई तेज कर दी है। नगर निगम कमिश्नर को हटाया गया है, जबकि कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और मरीजों के मुफ्त इलाज के आदेश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्र में टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है।

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