काराकास/वाशिंगटन: वेनेजुएला की राजधानी काराकास और आसपास के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका द्वारा की गई कथित ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव की नई लहर पैदा कर दी है। इन हमलों के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने पूरे देश में आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित कर दिया है। रूस और चीन ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार देते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है, जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तीखी बहस छिड़ गई है।

हमले और तत्काल प्रतिक्रिया

अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के कई सैन्य अड्डों और संदिग्ध ड्रग कार्टेल ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिका का दावा है कि ये हमले ड्रग तस्करी और आतंकवाद को समाप्त करने के लिए किए गए हैं। हालांकि, वेनेजुएला सरकार ने इसे “साम्राज्यवादी आक्रामकता” और तेल संसाधनों पर कब्जा करने की साजिश बताया है।

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हमलों के कुछ घंटों बाद राष्ट्रपति मादुरो ने सरकारी टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, “यह सीधा युद्ध है। हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार हैं।” उन्होंने वेनेजुएला की बोलिवेरियन नेशनल आर्म्ड फोर्सेस (FANB) को पूर्ण युद्ध तैयार रहने का आदेश दिया।

रूस और चीन का सख्त रुख

रूस ने अमेरिकी कार्रवाई को “खुली आक्रामकता” और “काउबॉय बर्ताव” करार दिया। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम अपने मित्र देश को अकेला नहीं छोड़ेंगे।” मॉस्को का आरोप है कि अमेरिका ड्रग्स के बहाने वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अपने S-300VM एयर डिफेंस सिस्टम और Su-30MK2 फाइटर जेट्स के जरिए अमेरिकी विमानों को चुनौती दे सकता है।

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चीन ने भी इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया और अमेरिका को “आग से खेलने” की चेतावनी दी। बीजिंग ने कहा कि वेनेजुएला से उसका भारी तेल आयात प्रभावित हो सकता है और लैटिन अमेरिका में बाहरी दखलंदाजी से मानवीय संकट पैदा होगा।

संयुक्त राष्ट्र में तनावपूर्ण बहस

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में रूस और चीन ने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तेल टैंकरों पर नाकेबंदी की निंदा की। अमेरिकी राजदूत ने पलटवार करते हुए कहा कि मादुरो शासन ड्रग तस्करी और आतंकवाद को संरक्षण दे रहा है। यूएन महासचिव ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और मानवीय आधार पर युद्ध रोकने की अपील की।

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वेनेजुएला की सैन्य ताकत

वेनेजुएला के पास रूसी S-300VM (Antey-2500) एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 250 किमी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है। इसके अलावा Buk-M2, Pechora-2M मिसाइलें, Su-30MK2 फाइटर जेट्स, चीनी JYL-1 और JY-27 रडार, VN-16/18 टैंक और रूसी वैगनर ग्रुप की संभावित मौजूदगी है। मादुरो के पास करीब 40 लाख नागरिक मिलिशिया भी है, जो गुरिल्ला युद्ध में उपयोगी हो सकती है।

विशेषज्ञों का आकलन

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि तकनीकी रूप से अमेरिका का दबदबा है, लेकिन रूसी-चीनी हथियारों और गुरिल्ला रणनीति के कारण यह युद्ध अत्यंत महंगा और लंबा हो सकता है। यदि रूसी तकनीशियनों को नुकसान पहुंचा तो स्थिति ‘तीसरे विश्व युद्ध’ जैसी हो सकती है।

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