चमोली । उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में भारत–चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकास का एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा ‘ऑल वेदर रोड’ परियोजना के अंतर्गत स्यून गदरे के समीप 104 मीटर लंबे विशालकाय स्टील ब्रिज का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है। यह पुल अगले वर्ष तक यातायात के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।

दुर्गम और चुनौतीपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में निर्मित यह पुल इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों में पहली बार इतने बड़े स्तर पर स्टील ब्रिज का निर्माण किया गया है, जिससे भारतीय सेना और आईटीबीपी की अग्रिम चौकियों तक रसद सामग्री एवं भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुगम होगी। इससे सीमा सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी।

यह भी पढ़ें :  पगना की महिलाओं ने किया ऐलान, शराब परोसी तो 50 हजार का जुर्माना

पुल के स्थानीय लाभों पर प्रकाश डालते हुए ढाक वार्ड की जिला पंचायत सदस्य आरुषि बुटोला ने कहा कि इस पुल के निर्माण से नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कई पुराने पुल जर्जर अवस्था में थे, जो आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे थे। आधुनिक पुलों के निर्माण से न केवल ग्रामीणों की आवाजाही सुरक्षित होगी, बल्कि उन्हें बड़ी राहत भी मिलेगी। साथ ही, इससे भविष्य में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं भी खुलेंगी।

यह भी पढ़ें :  महाराष्ट्र के नागपुर जिले में भीषण विस्फोट : एसबीएल एनर्जी लिमिटेड कारखाने में धमाके से 15 से 17 लोगों की मौत, 18 घायल

वहीं, जोशीमठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि यह पुल सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। इसके साथ ही नीति घाटी के अब तक कम पहचाने गए पर्यटन स्थलों तक सैलानियों की पहुंच आसान होगी। इससे पर्यटकों को बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया संबल प्राप्त होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *