नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की नवीनतम रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए घातक हमले से जोड़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सदस्य देश ने जानकारी दी है कि जैश-ए-मोहम्मद ने कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिसमें 9 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुए कार बम विस्फोट का भी संबंध है। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक घायल हुए थे।

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यह विस्फोट एक संदिग्ध सुसाइड कार बम हमला था, जिसमें एक सफेद हुंडई i20 कार में विस्फोटक भरे गए थे। पुलिस जांच में इसे आतंकी कृत्य करार दिया गया और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामला अपने हाथ में ले लिया। जांच में ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसमें डॉक्टर और प्रोफेशनल शामिल थे, जो जैश-ए-मोहम्मद और अन्य समूहों से जुड़े थे।

रिपोर्ट में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर द्वारा 8 अक्टूबर 2025 को ‘जमात-उल-मुमिनात’ (Jamaat ul-Muminat) नामक महिला-केंद्रित विशेष विंग की औपचारिक घोषणा की भी पुष्टि की गई है। यह विंग आतंकी हमलों को समर्थन देने, भर्ती और सहायता के लिए बनाई गई है, जो संगठन की बदलती रणनीतियों को दर्शाता है। UN की निगरानी टीम ने चिंता जताई है कि दबाव के बावजूद जैश जैसे समूह नए भर्ती मॉडल और प्रतीकात्मक हमलों के जरिए अनुकूलन जारी रखे हुए हैं।

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रिपोर्ट में सदस्य देशों के बीच मतभेद भी उजागर हुए हैं—कुछ देश जैश को सक्रिय और खतरनाक मानते हैं, जबकि अन्य (जैसे पाकिस्तान) इसे निष्क्रिय बताते हैं। ऐसी विसंगतियां दक्षिण एशिया में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई को जटिल बनाती हैं।

यह खुलासा पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि जैश को UN द्वारा अल-कायदा से जुड़ा आतंकी संगठन घोषित किया गया है और भारत लंबे समय से इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लाल किला जैसे प्रतीकात्मक स्थल पर हमला क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।

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