नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हल्द्वानी (उत्तराखंड) में रेलवे की जमीन पर बसे परिवारों के पुनर्वास को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश दिया कि वह एक विशेष शिविर आयोजित करे, ताकि रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक सरकारी/रेलवे भूमि पर रह रहे और बेदखली का सामना कर रहे परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन कर सकें। यह मामला हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां रेलवे की लगभग 29-32 एकड़ भूमि पर दशकों से हजारों परिवार (करीब 50,000 लोग) बसे हुए हैं। रेलवे ने इस भूमि को परियोजना विकास (जैसे रेलवे विस्तार) के लिए आवश्यक बताते हुए अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

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याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलीलें

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी कि:

  • यहां करीब 5,000 परिवार दशकों से रह रहे हैं, कई के पास पट्टे वाली जमीन है।
  • रेलवे ने पहले कभी इस भूमि की मांग नहीं की थी।
  • उन्होंने एक मैप पेश किया, जिसमें पास की खाली जमीन का उपयोग सुझाया गया।
  • एक साथ इतने बड़े पैमाने पर परिवारों को पीएमएवाई के तहत घर उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है।
  • दिल्ली की झुग्गी पुनर्वास नीति की तरह यहां भी कोई कट-ऑफ तारीख निर्धारित होनी चाहिए।
  • भूषण ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन बहुत कम परिवार ही पात्र पाए जाएंगे।
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केंद्र सरकार और रेलवे का पक्ष

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि:

  • भूमि रेलवे की है और परियोजना के लिए आवश्यक है; अतिक्रमणकारी शर्तें नहीं थोप सकते।
  • पात्र परिवारों को विस्थापन के बाद छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये का अंतरिम भत्ता दिया जाएगा।
  • रेलवे और राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों की सामूहिक पहचान करने तथा पुनर्वास व्यवस्था का आश्वासन दिया।
  • केंद्र ने बताया कि 13 जमीनों पर फ्रीहोल्ड है, और हर्जाना राज्य व रेलवे दोनों मिलकर देंगे।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश और अगली सुनवाई

उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority) को शिविर लगाने का निर्देश, जहां परिवार पीएमएवाई आवेदन कर सकें। शिविर रमजान के बाद (15 मार्च के बाद) आयोजित हो, और 31 मार्च तक पूरा किया जाए। नैनीताल के कलेक्टर को आवेदनों की पात्रता जांचकर रिपोर्ट सौंपने का आदेश। तब तक रेलवे भूमि से कोई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी।

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यह निर्देश हल्द्वानी में लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक अहम कदम है, जहां पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में हाईकोर्ट के बेदखली आदेश पर रोक लगाई थी और मानवीय पुनर्वास पर जोर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेलवे की भूमि पर रहने वालों को पुनर्वास का अधिकार है, लेकिन वे भूमि पर दावा नहीं कर सकते।

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