देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के पास कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी और ज्वैलरी मिलने की खबरों के बीच रावत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बरामदगी से जुड़े वास्तविक तथ्य आने वाले समय में सामने आएंगे। साथ जीना को अपना पूर्व ओएसडी बताते हुए रावत ने कहा कि वह विनम्र और कर्मठ व्यक्ति रहे हैं। हालांकि, यदि ग्राम सेवक भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या किसी अन्य गड़बड़ी के आरोप प्रमाणित होते हैं तो वह इसके लिए लज्जित होंगे। फिलहाल उन्हें आरोपों पर विश्वास नहीं है। उन्होंने कांग्रेस में दोनों पद छोड़ने की भी पेशकश की।

नरेटिव बनाने का प्रयास: रावत

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हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड चुनाव में भारी दांव लगा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार उनके घर के बजाय उनके एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रही है और ऐसे समय में उनके किसी भी कृत्य से पार्टी के संघर्ष को कमजोर नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस के दो पदों से हटने की पेशकश

रावत ने कहा कि उन्होंने अपने ईष्ट देवता का स्मरण कर निर्णय लिया है कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी के संघर्ष पर कोई असर पड़े।

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42 हजार से अधिक भर्तियों का दावा

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को लेकर रावत ने दावा किया कि उनके तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने समय पर परीक्षाएं कराने के लिए लोक सेवा आयोग को बाध्य किया तथा मेडिकल और शिक्षा भर्ती बोर्डों का गठन भी किया।

रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनसे कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है तो वह इसके लिए प्रदेश की जनता से क्षमा मांगते हैं।

‘प्रमाण हों तो जांच एजेंसियों को दें’

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अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति पर रावत ने कहा कि नियुक्ति उनके पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर हुई थी और शिकायत मिलने के बाद उन्होंने उन्हें हटाया अथवा इस्तीफा मांगा था। उन्होंने कहा कि नियुक्ति को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी से भी उन्हें सलाह मिली थी।

रावत ने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि भर्ती मामलों में उनकी संलिप्तता के किसी के पास प्रमाण हैं तो उन्हें सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनसे कोई चूक हुई है तो वह कानून के तहत दंड के लिए तैयार हैं।

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