• कुट्ठा गांव की बबीता रावत: ‘होम स्टे योजना’ से आत्मनिर्भरता की मिसाल

टिहरी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ग्रामीण स्वरोजगार नीति और पंडित दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना से बबीता ने पाई नई पहचान। नई टिहरी जनपद के चंबा ब्लॉक के गांव कुट्ठा की बबीता रावत आज अपने “होम स्टे” से न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

पहले बबीता शहर में रहती थीं, लेकिन कोविड के समय जब गांव लौटीं, तो उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और पंडित दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना के तहत “होम स्टे योजना” के बारे में सुना। योजना के अंतर्गत उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ और वर्ष 2021 में उन्होंने अपने गांव में पहला होम स्टे शुरू किया। शुरुआत में केवल कुछ पर्यटक ही आते थे, लेकिन सरकार की “Incredible Uttarakhand” और “Dekho Apna Desh” जैसी पहलों से उनके होम स्टे की पहचान बढ़ी। अब उनके यहाँ रोज देश-विदेश से पर्यटक आते हैं जो पहाड़ी संस्कृति, स्थानीय भोजन और पारंपरिक जीवन का अनुभव लेने आते हैं।

यह भी पढ़ें :  भारत को इलेक्ट्रिक कार निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की तैयारी, राज्यसभा में सांसद डॉ. नरेश बंसल ने उठाया मुद्दा

बबीता अपने मेहमानों को न सिर्फ रहने और खाने की सुविधा देती हैं, बल्कि उन्हें उत्तराखंडी संस्कृति, व्यंजन और पारंपरिक हस्तशिल्प से भी परिचित कराती हैं। उनके मेन्यू में झंगोरे की खीर, मंडुवे की रोटी, काफुली और भांग की चटनी जैसे स्थानीय व्यंजन शामिल हैं, जिन्हें पर्यटक बेहद पसंद करते हैं। आज बबीता का होम स्टे सालाना 8 से 10 लाख रुपये का टर्नओवर कर रहा है और गांव की अन्य महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ने की प्रेरणा दे रहा है।

यह भी पढ़ें :  स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था के निर्माण के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

बबीता रावत कहती हैं – “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना ने हमें घर बैठे रोजगार दिया। अब हमें शहरों में भटकने की ज़रूरत नहीं, हमारे गांव ही अब रोजगार का केंद्र बन गए हैं।” बबीता ने अपने साथ दो अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। गांव में अब पाँच और होम स्टे शुरू हो चुके हैं, जिससे दर्जनों परिवारों को आजीविका मिली है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और पंडित दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना के माध्यम से बबीता रावत ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छा शक्ति हो, तो पहाड़ की महिलाएँ किसी से पीछे नहीं। उनका होम स्टे आज न केवल आत्मनिर्भरता का प्रतीक है बल्कि धामी सरकार की महिला-सशक्तिकरण नीति की जीवंत मिसाल भी बन गया है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का यह विज़न भी साकार होता दिख रहा है कि – “भारत सरकार वाइब्रेंट विलेज योजना पर ज़ोर दे रही है, हर गाँव पर्यटन का केन्द्र बनना चाहिए।”

यह भी पढ़ें :  मूसलाधार बारिश से उत्तराखंड बेहाल: यमुनोत्री पैदल मार्ग धंसा, दो कांवड़िए घायल, टिहरी की नौ सड़कें बंद

बबीता रावत की कहानी इस विज़न की जमीनी तस्वीर है – जहाँ एक गाँव, एक महिला, और एक विचार मिलकर पूरे क्षेत्र को “वाइब्रेंट विलेज” में बदलने की राह दिखा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *