नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए नए लेबर कोड्स को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। नए नियमों के तहत कर्मचारियों को हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का विकल्प मिल सकता है। साथ ही ओवरटाइम करने पर दोगुना भुगतान और नौकरी छोड़ने पर जल्द फुल एंड फाइनल सेटलमेंट जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित की गई हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था सभी कंपनियों पर अनिवार्य नहीं होगी। कंपनियां अपनी जरूरत और कर्मचारियों की सहमति के आधार पर 4 डे वर्किंग मॉडल अपना सकेंगी। हालांकि, कुल कार्य अवधि 48 घंटे प्रति सप्ताह ही रहेगी।

4 दिन काम तो रोज करना होगा 12 घंटे कार्य

नए नियमों के अनुसार यदि कोई कंपनी 4 दिन का वर्किंग वीक लागू करती है, तो कर्मचारियों को प्रतिदिन लगभग 12 घंटे तक काम करना पड़ सकता है। इसमें ब्रेक का समय भी शामिल रहेगा। वहीं 5 दिन काम करने वाले कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन काम के घंटे कम रहेंगे।

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ओवरटाइम पर मिलेगा डबल पैसा

लेबर कोड में ओवरटाइम नियमों को भी कर्मचारियों के पक्ष में मजबूत किया गया है। तय समय से अधिक काम कराने पर कंपनियों को कर्मचारियों को दोगुना भुगतान करना होगा। ओवरटाइम की गणना बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर की जाएगी।

नियमों के मुताबिक शिफ्ट समाप्त होने के बाद 15 से 30 मिनट तक अतिरिक्त काम करने पर आधे घंटे का ओवरटाइम माना जाएगा, जबकि 30 मिनट से अधिक काम करने पर पूरे एक घंटे का ओवरटाइम लागू होगा।

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ओवरटाइम की सीमा भी तय

सरकार ने कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ओवरटाइम की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की है। बिना ओवरटाइम के किसी कर्मचारी से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा। वहीं ओवरटाइम सहित एक दिन में कुल कार्य अवधि 12 घंटे से अधिक नहीं होगी।

इसके अलावा तीन महीने की अवधि में अधिकतम 125 से 144 घंटे तक ही ओवरटाइम कराया जा सकेगा। यह सीमा अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार तय होगी।

नौकरी छोड़ने पर दो दिन में होगा भुगतान

नए लेबर कोड्स के तहत कर्मचारियों को एक और बड़ी राहत दी गई है। यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, इस्तीफा देता है या कंपनी उसे हटाती है, तो कंपनी को दो कार्य दिवस के भीतर उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा। इसमें लंबित ओवरटाइम भुगतान भी शामिल रहेगा।

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29 पुराने कानूनों की जगह आएंगे 4 नए कोड

केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड तैयार किए हैं। इनमें वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और कार्यस्थल की स्थितियों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। केंद्र सरकार इन कोड्स को मंजूरी दे चुकी है, हालांकि कई राज्यों में इनके नियम अभी तैयार किए जा रहे हैं।

सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना, कार्यस्थल पर पारदर्शिता बढ़ाना और श्रमिकों के शोषण को रोकना है।

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