कर्णप्रयाग (चमोली): कर्णप्रयाग पुलिस ने करीब एक महीने पुराने सनसनीखेज ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा करते हुए हत्यारोपी नरेन्द्र सिंह तोपाल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी क्षेत्र पंचायत सदस्य बताया जा रहा है, जिसने उधारी और सामाजिक अपमान से तंग आकर इस वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के निर्देशन में गठित एसआईटी और एसओजी टीम ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच के आधार पर इस जटिल मामले की गुत्थी सुलझाई।

दरअसल, 10 मार्च 2026 को अलकनंदा नदी किनारे लंगासू क्षेत्र में चंडिका माता मंदिर के नीचे एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। शव के हाथ-पैर प्लास्टिक की रस्सी से बंधे थे, जिससे प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका जताई गई। मृतक के हाथ पर “SOORAJ PUROHIT” लिखा मिला, लेकिन तत्काल पहचान नहीं हो सकी।

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पुलिस ने फिंगरप्रिंट और स्थानीय स्तर पर जांच शुरू की, लेकिन 72 घंटे तक पहचान न होने पर पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसी बीच मृतक के हाथ पर लिखे नाम को आधार बनाकर पुलिस ने ‘पुरोहित’ उपनाम से जुड़े क्षेत्रों में जांच तेज की।

जांच में तकनीकी सर्विलांस के जरिए सुराग नंदप्रयाग तक पहुंचा। 23 मार्च को मृतक की पत्नी मंजू देवी ने सोशल मीडिया पर जारी तस्वीरों से शव की पहचान अपने पति सूरज पुरोहित के रूप में की। इसके बाद 24 मार्च को कोतवाली कर्णप्रयाग में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।

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तफ्तीश के दौरान पता चला कि सूरज पुरोहित नंदप्रयाग के एक होटल में ठहरा हुआ था और आरोपी नरेन्द्र तोपाल के माध्यम से एक ढाबे में काम कर रहा था। पूछताछ में शुरू में आरोपी ने गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों ने सच्चाई उजागर कर दी।

फुटेज में आरोपी को 16 फरवरी की रात शव को प्लास्टिक के कट्टे में कार (अल्टो UK12A 3212) की डिग्गी में रखकर झूलाबगड़ पुल की ओर ले जाते और बाद में वाहन धोते हुए देखा गया। सख्ती से पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसने सूरज की हत्या कर शव को पुल से नदी में फेंक दिया था और साक्ष्य मिटाने के लिए मोबाइल व अन्य सामान भी बहा दिए।

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उधारी और अपमान बना हत्या का कारण

आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने मृतक से ₹10,000 उधार लिए थे। मृतक द्वारा बार-बार सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने और पैसे की मांग को लेकर वह मानसिक रूप से आक्रोशित था, जिसके चलते उसने हत्या की योजना बनाई।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार और रस्सी बरामद कर ली है। वहीं, FSL टीम ने वाहन से अहम साक्ष्य जुटाकर जांच के लिए भेजे हैं। इस मामले के सफल खुलासे पर उच्च अधिकारियों ने पुलिस टीम की सराहना की है और टीम को ₹5,000 का नगद पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।

 

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