देहरादून: आज गुरुवार से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ शुरू हो गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह नौ दिवसीय उत्सव माता भगवती की आराधना, संकल्प, साधना और सिद्धि का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु उपवास, पूजा-पाठ और ध्यान के माध्यम से तन-मन को शुद्ध और निरोग रखने का प्रयास करते हैं।

मान्यता है कि देवी ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में सृष्टि के सृजन, पालन और संहार का संचालन करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान महादेव के आह्वान पर मां पार्वती ने रक्तबीज, शुंभ-निशुंभ और मधु-कैटभ जैसे असुरों के विनाश के लिए अनेक रूप धारण किए। हालांकि नवरात्रि में देवी के नौ प्रमुख स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

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नवरात्रि के पहले दिन, चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है और मां के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की उपासना से जीवन में स्थिरता, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा करने से भक्तों के विभिन्न मनोरथ पूर्ण होने की मान्यता है। मंदिरों और घरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया है और वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

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