गोपेश्वर (चमोली)। सीटू ने राज्य सरकार की ओर से 1 अप्रैल 2024 से लागू वाणिज्यिक अधिष्ठानों और दुकानों के लिए निर्धारित वेतनमानों को अवैज्ञानिक बताते हुए संशोधन की मांग की है।

सीटू जिलाध्यक्ष मदन मिश्रा नेे कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में श्रमिकों और कर्मचारियों को दिए जा रहे वेतन से परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। कहा कि अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम वेतन कम से कम 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए तथा अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतनमान भी उसी अनुरूप तय किए जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का गठन तो करती है, लेकिन उसमें इंटक, एटक और सीटू जैसे केंद्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जाता। संगठन ने मांग की कि श्रम संगठनों को बोर्ड में शामिल कर स्वस्थ चर्चा और मानकों के आधार पर न्यूनतम वेतन तय किया जाए।

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मिश्रा ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बाद भी इंजीनियरिंग उद्योग के लिए अलग वेजबोर्ड का गठन नहीं किया गया है। वर्तमान में एकीकृत उत्तर प्रदेश की ओर से वर्ष 2000 में तय मूल वेतन को आधार बनाकर ही मजदूरों के वेतन का निर्धारण किया जा रहा है। उन्होंने ने इंजीनियरिंग उद्योग के लिए शीघ्र वेजबोर्ड गठन कर श्रमिकों के वेतन का पुनर्निर्धारण करने की मांग उठाई।

ज्ञापन के माध्यम से रुद्रपुर और हल्द्वानी में मजदूरी बढ़ोतरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे श्रमिकों, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने तथा जेलों में बंद लोगों को रिहा करने की मांग भी की गई। सीटू ने आरोप लगाया कि श्रमिक आंदोलनों पर दमन और शोषण किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से लागू किए जा रहे चार श्रम कोडों में राज्य सरकार से मजदूर हित में संशोधन करने और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग भी रखी गई। उन्होंने मुख्यमंत्री से श्रमिकों की समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि श्रमिकों को उचित मजदूरी और उत्पीड़न से राहत मिल सके।

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इस दौरान सीटू के जिला उपाध्यक्ष मदन मिश्रा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री सेविका कर्मचारी यूनियन की जिलाध्यक्ष भारती राणा, जनवादी महिला समिति की जिलाध्यक्ष गीता बिष्ट विजया भट्ट, कल्पेश्वरी देवी, दीपा देवी, सुशीला देवी, सरस्वती देवी आदि मौजूद रहे।

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