मंगलौर। उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) स्थापना दिवस के अवसर पर राजकीय महाविद्यालय मंगलौर में एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तीर्थ प्रकाश ने की। शिविर की शुरुआत स्वयंसेवकों द्वारा श्रमदान से हुई, जिसके बाद राष्ट्रीय गीत के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। स्वयंसेवकों काजल, पूजा, वंशिका और निशा ने गीत प्रस्तुत किए, जबकि शिखा ने मनमोहक नृत्य से सभी का दिल जीता। वर्षा और उपासना ने “उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना” विषय पर प्रभावशाली भाषण दिए।

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कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपा शर्मा ने उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए ‘देवभूमि’ की विशेषता बताई और कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य युवाओं में सेवा, अनुशासन और सामाजिक चेतना की भावना जागृत करना है। इसके बाद डॉ. कलिका काले ने उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति और लोक गीतों की विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की।

शिविर में विद्यार्थियों ने श्रमदान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भाषणों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया। यह आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना के मूल मंत्र “मैं नहीं, लेकिन तुम” (Not Me But You) और उत्तराखण्ड की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल रहा। कार्यक्रम के दौरान डॉ. रचना वत्स, डॉ. राम भरोसे, सर्मिष्ठा, गीता जोशी, कुमारी निरजेश, सुनील सूर्या, फैजान, जगपाल सहित सभी शिक्षक और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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