श्रीनगर: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में तनाव चरम पर पहुंच गया है। घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिसके चलते प्रशासन ने सख्त सुरक्षा उपाय अपनाए हैं। श्रीनगर सहित कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में निषेधाज्ञा और पाबंदियां लागू कर दी गई हैं, जबकि राजौरी और पुंछ जिलों में भी बंद का आह्वान किया गया है।

अमेरिका-इजरायल की संयुक्त हवाई कार्रवाई में खामेनेई की मौत की खबर के बाद रविवार से कश्मीर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। सोमवार को यह दूसरा दिन रहा, जिसमें श्रीनगर के लाल चौक को पूरी तरह सील कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने “डेथ टू अमेरिका, डेथ टू इजरायल” के नारे लगाए और कई जगहों पर पथराव हुआ, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं धीमी कर दी गई हैं और प्रमुख इलाकों में भारी पुलिस और पैरामिलिट्री बल तैनात हैं।

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शैक्षणिक संस्थान बंद, परीक्षाएं टलीं

प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कश्मीर घाटी में सभी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को दो दिनों (2 और 3 मार्च) के लिए बंद कर दिया है। कश्मीर विश्वविद्यालय (KU) ने अपनी चल रही परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। क्लस्टर यूनिवर्सिटी श्रीनगर (CUS) सहित अन्य विश्वविद्यालयों ने भी परीक्षाएं टाल दी हैं। नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी। यह फैसला घाटी में सर्दियों की छुट्टियों के बाद कक्षाएं फिर से शुरू होने वाले समय पर आया है, जिससे छात्रों को असुविधा हो रही है।

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राजौरी-पुंछ में बंद का आह्वान

राजौरी और पुंछ जिलों में भी मुस्लिम समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। कई मुस्लिम संगठनों ने मंगलवार को राजौरी में बंद का ऐलान किया है। मंडी और अन्य इलाकों में भी बंद का असर देखा गया। इन जिलों में शिया आबादी काफी है, जहां खामेनेई की मौत पर शोक सभाएं और प्रदर्शन हुए।

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