चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित जोशीमठ (ज्योतिर्मठ) में भू-धंसाव का खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, शहर में जमीन खिसकने की प्रक्रिया धीमी गति से जारी है, लेकिन आगामी मानसून में भारी बारिश होने पर इसकी रफ्तार बढ़ सकती है, जिससे स्थिति फिर गंभीर हो सकती है।

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि जोशीमठ एक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और यहां लगातार निगरानी की जरूरत है। साल 2022 में शुरू हुई भू-धंसाव की समस्या 2023 में बड़े संकट के रूप में सामने आई थी, जब 800 से अधिक मकानों में दरारें पड़ गई थीं और कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। रिपोर्टों के अनुसार, जोशीमठ में कुल 2152 मकानों में से 1403 प्रभावित हुए थे। इनमें 472 मकानों के पुनर्निर्माण और 931 की मरम्मत की जरूरत बताई गई थी, जबकि 181 भवनों को खाली कराना पड़ा था।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, जोशीमठ क्षेत्र पुराने भू-स्खलन या ग्लेशियर से बने मलबे पर बसा है, जिसके कारण जमीन अस्थिर बनी हुई है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि शहर में स्लोप खिसकने की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते मॉनिटरिंग और चेतावनी प्रणाली विकसित कर लोगों को सुरक्षित किया जा सकता है।

वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने चेतावनी दी है कि मानसून के दौरान यदि जमीन खिसकने की गति बढ़ती है तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल प्रभावित मकानों को चिन्हित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम और समय पर विस्थापन की योजना जरूरी है।

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सरकार के प्रयास जारी

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, जोशीमठ में भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में ट्रीटमेंट कार्य शुरू कर दिया गया है। टो प्रोटेक्शन और स्लोप स्टेबलाइजेशन के लिए करीब 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही सीवरेज, ड्रेनेज और पेयजल से जुड़े कार्यों के टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि विस्थापन की प्रक्रिया अब भी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि कई लोग निर्धारित स्थानों पर जाने को तैयार नहीं हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में जोशीमठ के पुनर्विकास के लिए 1658.17 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत “बिल्ड बैक बैटर” सिद्धांतों पर आधारित कार्य तीन वर्षों में पूरा किया जाना है। फिलहाल विशेषज्ञों की चेतावनी और प्रशासन की तैयारियों के बीच जोशीमठ के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों में मानसून को लेकर चिंता बनी हुई है।

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