नई दिल्ली: Parliament of India का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो गया है। इस सत्र में केंद्र सरकार महिला आरक्षण को जल्द लागू करने और चुनावी ढांचे में बदलाव से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है।

तीन बड़े विधेयकों पर फोकस

सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल है, जिसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है। इसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जा सकती हैं।

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दूसरा विधेयक परिसीमन से जुड़ा है, जिसमें नए परिसीमन आयोग के गठन का प्रस्ताव है। यह आयोग 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण करेगा।

तीसरा विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों—जैसे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुदुचेरी—की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ करेगा।

2029 चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी

सरकार का लक्ष्य Nari Shakti Vandan Adhiniyam के प्रावधानों को संशोधित कर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही महिलाओं को 33% आरक्षण देना है। इससे पहले 2023 में पारित कानून में यह प्रावधान था कि आरक्षण लागू करने से पहले नई जनगणना और परिसीमन जरूरी होगा, जिससे इसमें देरी हो रही थी।

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क्या बदल जाएगा?

  • लोकसभा की सीटें बढ़कर 850 तक हो सकती हैं
  • करीब 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी (लगभग 280 सीटें)
  • परिसीमन के लिए 2011 जनगणना का आधार इस्तेमाल हो सकता है
  • परिसीमन प्रक्रिया को जनगणना से अलग करने का प्रस्ताव

विपक्ष की आपत्ति

विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge और अन्य नेताओं का आरोप है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक लाभ के लिए लाई जा रही है। वहीं Sonia Gandhi ने इसे संविधान पर हमला बताया है।

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दक्षिणी राज्यों के नेताओं का कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा होने से उत्तर भारत को अधिक लाभ मिलेगा और दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि इन विधेयकों का उद्देश्य महिलाओं को जल्द से जल्द प्रतिनिधित्व देना और चुनावी व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाना है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि परिसीमन प्रक्रिया में सभी राज्यों और राजनीतिक दलों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

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