रूडकी : Arya Samaj के स्थापना दिवस के अवसर पर रामनगर स्थित आर्य समाज मंदिर में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य बिहारी लाल द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर आचार्य बिहारी लाल ने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप आत्मा और परमात्मा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने धर्म के दस लक्षणों – क्षमा, संयम, अस्तेय, शौच, इन्द्रिय निग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध – का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सिद्धांतों का पालन कर मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।

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उन्होंने बताया कि Swami Dayanand Saraswati द्वारा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रमी संवत 1932 में Arya Samaj Mumbai की स्थापना की गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने कर कमलों से लाहौर, बीटी गंज रूड़की और बुढाना गेट मेरठ सहित विभिन्न स्थानों पर आर्य समाज की स्थापना कर समाज सुधार का व्यापक आंदोलन प्रारम्भ किया।

आचार्य बिहारी लाल ने कहा कि आर्य समाज मानव कल्याण के लिए एक क्रांतिकारी आंदोलन रहा है। उन्होंने बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने ही सबसे पहले स्वराज का नारा दिया था। स्वतंत्रता आंदोलन में Swami Shraddhanand, गुरुदत्त विद्यार्थी, श्यामवर्मा, पंडित लेखराज, हंसराज, स्वामी स्वतन्त्रतानन्द, नारायण स्वामी और महाशय राजपाल सहित अनेक आर्य समाजियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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उन्होंने बताया कि इसी पवित्र दिन को सृष्टि की उत्पत्ति का दिवस भी माना जाता है। साथ ही यह दिन Rama के राज्याभिषेक, Yudhishthira के राज्याभिषेक, Guru Angad तथा Keshav Baliram Hedgewar के जन्मदिवस के रूप में भी विशेष महत्व रखता है।

कार्यक्रम में रामेश्वर, प्रणव, केपी सिंह, ऋषिपाल, हरपाल, सुधीर, जगत सिंह, अनीता, आनंद, मदनपाल, पूजा, विवेक, सहदेव, त्रिवेन्द्र, अरबिंद, नेमवती, प्रज्ज्वल, उज्ज्वल, यशवंत और सतीश आर्य सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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