ईटानगर/गुवाहाटी : North East Weather Updates: पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी आफत ने दस्तक दे दी है। अरुणाचल प्रदेश के नवगठित केयी पैन्योर (Keyi Panyor) जिले में बुधवार सुबह मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई भयानक बाढ़ (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के पानी और मलबे की चपेट में आने से निचले इलाकों के 18 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि यजाली सर्कल के तहत पूसा के पास स्थित नीपको (NEEPCO) प्रोजेक्ट कॉलोनी में तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, नेशनल हाईवे-315 पर कई जगहों पर हुए भीषण भूस्खलन (Landslide) के कारण असम और अरुणाचल प्रदेश का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे सैकड़ों गाड़ियां और यात्री बीच रास्ते में फंस गए हैं।

Retaining Wall गिरने से डूबी NEEPCO कॉलोनी, 3 लोग बहे

राज्य आपदा प्रबंधन सचिव दानी सुलू ने घटना की गंभीरता की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र में बन रही एक सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) भारी बारिश के दबाव के कारण अचानक ढह गई। दीवार गिरते ही कॉलोनी और उसके आस-पास के निचले रिहायशी इलाकों में मलबे के साथ लाखों गैलन पानी भर गया। इस हादसे में तीन लोग लापता हो गए हैं, जिनकी तलाश के लिए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें जुटी हुई हैं।

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NH-315 पर लैंडस्लाइड: असम-अरुणाचल बॉर्डर पर लगा लंबा जाम

पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण नेशनल हाईवे-315 पर पहाड़ दरकने का सिलसिला जारी है। बुधवार को असम के डिब्रूगढ़ जिले में जॉयपुर के पास और अरुणाचल के तिरप में एनएच-315 (A) के देउमाली-खुंसा कनेक्टिंग पॉइंट पर भारी लैंडस्लाइड हुई है।

  • रात में हाईवे पूरी तरह बंद: पिछले साल चौड़े किए गए जॉयपुर हाईवे पर तीन प्रमुख जगहों पर मलबा आने के कारण गाड़ियों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया है। सुरक्षा के लिहाज से रोजाना शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक हाईवे को पूरी तरह बंद रखने का फैसला किया गया है।

  • जनजीवन प्रभावित: अरुणाचल के तिरप जिले के खुंसा, देउमाली, सोहा और नामसांग के हजारों लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और इलाज के लिए इसी हाईवे के जरिए असम के डिब्रूगढ़ और नाहरकटिया आते-जाते हैं, जो अब पूरी तरह ठप है।

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याजाली में महज 3 घंटे में बरसी आफत, 

गुवाहाटी के क्षेत्रीय मौसम केंद्र (RMC) के अनुसार, निचले सुबनसिरी जिले के याजाली स्टेशन पर पिछले 24 घंटों में 72.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से अधिकांश बारिश बुधवार सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे के बीच यानी मात्र 3 घंटे में हुई।

इस अचानक आई बाढ़ के कारण पैन्योर लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (रंगानदी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट) में पानी का स्तर खतरे के निशान को पार कर गया। डैम की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए तुरंत एक स्पिलवे गेट (Spillway Gate) खोल दिया है।

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असम सरकार हाई अलर्ट पर

अरुणाचल के पहाड़ों में हो रही इस भीषण बारिश का सीधा असर असम के मैदानी इलाकों पर पड़ने लगा है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के निर्देश पर मुख्य सचिव ने हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है और राज्य को हाई अलर्ट पर रखा है।

ऊपरी इलाकों से छोड़े गए पानी के कारण असम में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बाढ़ की यह लहर अगले 24 से 48 घंटों में असम के इन जिलों को सबसे पहले प्रभावित कर सकती है:

  • धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ और सोनितपुर (सबसे ज्यादा संवेदनशील)

  • इसके बाद यह लहर अन्य जिलों से गुजरते हुए धुबरी तक पहुंचेगी। प्रशासन ने एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।

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