नई दिल्ली। देश में नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर चल रही बहस के बीच एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि क्या भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सकता है या यह केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। इस विषय पर वर्ष 2010 में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के बीच हुई चर्चा के दस्तावेज अब फिर चर्चा का केंद्र बन गए हैं।

RTI के अधिकार को लेकर हुई थी चर्चा

जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत यह स्पष्ट करने के लिए विचार-विमर्श किया गया था कि सूचना मांगने का अधिकार किन लोगों को प्राप्त है। इस दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) के बीच नागरिकता की परिभाषा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी। रिकॉर्ड के अनुसार दोनों मंत्रालय इस बात पर सहमत थे कि विदेश में रहने वाले भारतीय पासपोर्ट धारक, यानी अनिवासी भारतीय (NRI), RTI अधिनियम के तहत सूचना मांगने के पात्र हैं और उन्हें भारतीय नागरिक माना जा सकता है।

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PIO और OCI को नहीं माना गया पात्र

चर्चा के दौरान भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों को भारतीय नागरिकों की श्रेणी से अलग रखा गया। मंत्रालयों की राय थी कि OCI और PIO कार्डधारक RTI अधिनियम के तहत सूचना मांगने के अधिकार का उपयोग नहीं कर सकते, क्योंकि वे पूर्ण भारतीय नागरिक नहीं हैं।

NRI की अर्जी के बाद उठा था मुद्दा

सरकार ने इस विषय पर विचार तब किया था जब अमेरिका में रह रहे एक भारतीय मूल के व्यक्ति ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर विदेशों में रहने वाले भारतीयों को मतदान और शासन व्यवस्था में अधिक भागीदारी का अवसर देने की मांग की थी।इसके बाद नागरिकता और RTI के अधिकार को लेकर विभिन्न सरकारी विभागों के बीच विचार-विमर्श शुरू हुआ।

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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा था?

सुनवाई और बैठकों के दौरान विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि उसकी दृष्टि में “नागरिक” की परिभाषा में केवल वे लोग शामिल हैं जो भारतीय पासपोर्ट रखते हैं और विदेश में रहते या काम करते हैं। यानी NRI भारतीय नागरिक माने जाएंगे। हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि OCI और PIO कार्डधारक इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं। चूंकि नागरिकता संबंधी मामलों में गृह मंत्रालय नोडल एजेंसी है, इसलिए अंतिम राय के लिए गृह मंत्रालय से भी परामर्श लिया गया था।

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CIC ने भी की थी पहल

विदेशों में रहने वाले कुछ भारतीय RTI कार्यकर्ताओं को आवेदन प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) से संपर्क किया। CIC ने प्रक्रिया को सरल बनाने और नियमों को स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ कई बैठकें आयोजित की थीं।

पासपोर्ट और नागरिकता पर जारी है बहस

विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट सामान्यतः किसी व्यक्ति की नागरिकता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है, लेकिन नागरिकता से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित कानूनों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जाता है। यही कारण है कि नागरिकता, पासपोर्ट, OCI और NRI की कानूनी स्थिति को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।

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