नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बीच अब संबंधों में स्थिरता और सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी की है। हालांकि, सीमा से जुड़े क्षेत्रों और पारंपरिक प्रशिक्षण इलाकों में कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के आकार की करीब 10 टुकड़ियां अब भी तैनात हैं।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर चीनी सैनिकों की संख्या में कमी के बावजूद भारतीय सेना की तैनाती मजबूत है। सेना सभी सेक्टरों में पूरी तरह तैयार और सतर्क है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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संवाद और सैन्य संपर्क हुए तेज

चीन की सैन्य तैनाती में कमी ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद दोबारा सक्रिय हुआ है। सीमा विवाद को लेकर बातचीत के कई तंत्र फिर से शुरू किए गए हैं।

वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की 33वीं और 34वीं बैठक मार्च और जुलाई 2025 में हुई। वहीं, सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों के स्तर की वार्ता भी दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में हुई। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच भी संवाद लगातार जारी रहा।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख में 25-26 अक्टूबर 2025 को 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक भी हुई थी। सीमा पर तैनात अधिकारियों के बीच बॉर्डर पर्सनल मीटिंग भी सभी सेक्टरों में सौहार्दपूर्ण माहौल में जारी रहने की बात कही गई है।

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मोदी-शी मुलाकात से भी बढ़ी उम्मीद

भारत-चीन संबंधों में सुधार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने करीब 50 मिनट तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं, शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने की बात कही और साझा विकास के लिए दोनों देशों के सहयोग की आवश्यकता बताई।

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सीमा पर शांति को अहम माना

भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के व्यापक संबंधों के लिए जरूरी है। ऐसे में LAC पर चीनी सैनिकों की तैनाती में कमी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संवाद को सकारात्मक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, सीमा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय सेना ने उत्तरी सीमाओं पर अपनी तैनाती और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा है। भारत का रुख है कि सीमा पर शांति, स्थिरता और मौजूदा व्यवस्थाओं का सम्मान द्विपक्षीय संबंधों में आगे की प्रगति की महत्वपूर्ण शर्त है।

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