मुंबई: मुंबई के लाखों रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। शहर को अपनी पहली नॉन-एसी (Non-AC) लोकल ट्रेन मिल गई है, जो ऑटोमैटिक बंद होने वाले दरवाजों से लैस है। यह पहल न केवल सफर को आधुनिक बनाएगी, बल्कि सालों से चली आ रही गिरकर होने वाली दुर्घटनाओं पर भी लगाम कसेगी।

हादसे से लिया सबक

इस विशेष ट्रेन का निर्माण मुंब्रा में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद रेल मंत्री के सीधे हस्तक्षेप और निर्देशों पर किया गया है। भारी भीड़ के कारण गेट से गिरकर होने वाली मौतों को रोकने के लिए रेलवे ने ऐसी तकनीक विकसित करने का फैसला किया, जो बिना एसी के भी यात्रियों को सुरक्षित रख सके।

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क्यों खास है यह ट्रेन?

आमतौर पर बंद दरवाजे केवल महंगी एसी ट्रेनों में ही देखे जाते थे, लेकिन यह पहली बार है जब सामान्य किराए वाली नॉन-एसी ट्रेन में यह सुविधा दी गई है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • ऑटोमैटिक डोर क्लोजिंग: जब तक दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होंगे, ट्रेन प्लेटफॉर्म से नहीं चलेगी। इससे ‘फुटबोर्ड’ पर लटककर यात्रा करने की खतरनाक आदत खत्म होगी।

  • बेहतर वेंटिलेशन: दरवाजों के बंद होने पर यात्रियों को घुटन न हो, इसके लिए ट्रेन की छतों और खिड़कियों पर उन्नत वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है, ताकि ताजी हवा का प्रवाह बना रहे।

  • सुरक्षा का कवच: यह कदम विशेष रूप से पीक आवर्स के दौरान होने वाली भीड़भाड़ को देखते हुए उठाया गया है, जहाँ डिब्बों से यात्रियों के गिरने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं।

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यात्रियों के लिए ऐतिहासिक मोड़

मुंबई लोकल के इतिहास में इसे एक ‘ऐतिहासिक कदम’ माना जा रहा है। अब तक बंद दरवाजों का मतलब केवल ‘प्रीमियम क्लास’ या एसी यात्रा समझा जाता था, लेकिन अब यह सुरक्षा आम आदमी के लिए भी उपलब्ध होगी।

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