अयोध्या: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच पूरी हो गई है। छह दिनों तक अयोध्या में डेरा डालकर सघन तफ्तीश करने के बाद लखनऊ लौटी एसआईटी सोमवार (आज) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 150 से अधिक पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने जा रही है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले की आंच अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में न केवल निचले स्तर के गणनाकर्मी बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों की भूमिका भी गंभीर लापरवाही और संदिग्ध संलिप्तता के दायरे में आई है। इस बीच, दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की एक विशेष टीम ने भी गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है, जिसके बाद अब ट्रस्ट के पुनर्गठन और बड़े चेहरों पर बड़ी कानूनी गाज गिरने की संभावना तेज हो गई है।

चंपत राय के पूर्व ड्राइवर ‘टिन्नू’ पर कस रहा शिकंजा

एसआईटी सूत्रों के अनुसार, जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर और वर्तमान में मंदिर व्यवस्थाओं में असीमित दखल रखने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, गणनाकर्मी लवकुश और अनुकल्प सहित पांच प्रमुख लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने की पूरी संस्तुति कर दी गई है।

  • 20 घंटे का शिकंजा: एसआईटी ने इन आरोपियों से 20 घंटे से अधिक समय तक कड़ी पूछताछ की। प्रारंभिक पूछताछ में इनके गोलमोल जवाबों और नकदी बरामदगी के पुख्ता सबूतों ने इनका अपराध लगभग तय कर दिया है।

  • IPS की निगरानी में होगी विवेचना: मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार इस मुकदमे की आगे की विवेचना किसी आईपीएस (IPS) अधिकारी की निगरानी में विशेष रूप से गठित टीम से कराने पर विचार कर रही है। एफआईआर में अज्ञात के रूप में कई अन्य बड़े चेहरों को शामिल किया जा सकता है।

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ट्रस्टियों को अयोध्या न छोड़ने का फरमान

चोरी का भंडाफोड़ होने के बाद मंदिर प्रबंधन ने त्वरित कदम उठाते हुए बैंक और ट्रस्ट की चंदा गिनती टीम में शामिल सभी 40 गणनाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

  • नई व्यवस्था: बैंक की ओर से अब नए गणनाकर्मियों को काम पर लगाया गया है, जो ट्रस्ट और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी और लाइव निगरानी में दान राशि की गणना कर रहे हैं।

  • शहर छोड़ने पर रोक: एसआईटी ने मामले की संवेदनशीलता और आगे की पूछताछ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख अधिकारियों और पदाधिकारियों को तत्काल अयोध्या न छोड़ने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

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PMO की सीधी नजर

एसआईटी रिपोर्ट में इस बात का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है कि मंदिर परिसर की पूरी निगरानी व्यवस्था ध्वस्त थी। तय की गई सरकारी गाइडलाइंस और सुरक्षा ऑडिट नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था, जिसका फायदा उठाकर बेखौफ तरीके से करोड़ों का गबन किया जाता रहा। यह प्रशासनिक लापरवाही ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के लिए बड़ी कानूनी मुसीबत बन सकती है।

चूंकि इस ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था, इसलिए इस पर पीएमओ की सीधी नजर है। पीएमओ के अधिकारियों ने भी हाल ही में गुप्त रूप से अयोध्या पहुंचकर एक समानांतर गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है। अब अंतिम कार्रवाई और ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर दिल्ली (PMO) से मिलने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।

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अपराधी को मिले कड़ी से कड़ी सजा

इस पूरे घटनाक्रम पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने संगठन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि चढ़ावे के गबन का यह मामला बेहद गंभीर है। जिसने भी यह घिनौना अपराध किया है, उसे कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। हम इस बात से संतुष्ट हैं कि ट्रस्ट की अपील पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल एसआईटी का गठन किया। हम चाहते हैं कि निष्पक्ष और गहराई से जांच हो, न कि किसी के प्रति सहानुभूति के आधार पर। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट आने से पहले कयासों के आधार पर सभी की छवि खराब करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आज रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, एसआईटी को विस्तृत जांच के लिए दो से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है, जिसमें गबन की गई कुल धनराशि के सटीक आंकड़ों और सोने-चांदी के गायब जेवरातों की परतों को खोला जाएगा।

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