नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) के अधिकांश राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ‘पर्यटन के पर्यावरणीय मूल्यांकन’ (EATIHR) रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों को पर्यावरण के अनुकूल बनाते हुए प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड ने रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न कदम उठाए हैं। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश ने अब तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है, जबकि केंद्र की ओर से कई बार स्मरण कराया जा चुका है।

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पर्यटन के बढ़ते दबाव से बढ़ी पर्यावरणीय चुनौतियां
हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, वहीं कई पर्यावरणीय समस्याएं भी उभरकर सामने आई हैं। ठोस कचरा प्रबंधन, वायु और जल प्रदूषण, जल स्रोतों का क्षरण, प्लास्टिक कचरे का बढ़ता प्रभाव और जैव विविधता पर खतरा प्रमुख चिंताएं बनकर उभरी हैं।

NGT के निर्देश पर तैयार हुई रिपोर्ट
EATIHR रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में दायर एक याचिका के बाद तैयार की गई थी, जिसमें अनियंत्रित पर्यटन के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी को हो रहे नुकसान की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था। मंत्रालय ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में बताया कि विभिन्न राज्यों ने नीतिगत सुधार, आधारभूत संरचना विकास और पर्यावरण प्रबंधन के जरिए इन सिफारिशों को लागू करना शुरू कर दिया है।

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राज्यों द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम

  • लद्दाख: कचरा पृथक्करण प्रणाली, ‘प्रोजेक्ट सांगदा’ के तहत ठोस कचरा प्रबंधन, वॉटर एटीएम की स्थापना और प्लास्टिक रिसाइक्लिंग जैसे उपाय किए गए हैं।
  • जम्मू-कश्मीर: तीर्थ स्थलों पर यात्रियों की संख्या का प्रबंधन, वायु और जल गुणवत्ता की निगरानी, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और कचरा निपटान की वैज्ञानिक व्यवस्था लागू की गई है।
  • हिमाचल प्रदेश: ‘पर्यटन नीति 2019’ और ‘इको-टूरिज्म नीति 2024’ के तहत इको-टूरिज्म, कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और वहन क्षमता अध्ययन पर जोर दिया जा रहा है।
  • उत्तराखंड: स्वच्छ परिवहन, कचरा प्रबंधन, जल स्रोतों की निगरानी, ‘ट्रैकिंग नियम 2025’ और सतत विकास कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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मंत्रालय ने कहा कि इन प्रयासों से हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊ पर्यटन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले समय में इन उपायों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।

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