देहरादून। उत्तराखंड के टिहरी झील क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने कवायद तेज कर दी है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर टिहरी झील रिंग रोड और आसपास के क्षेत्रों को “वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन” योजना के तहत विकसित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक राज्य-एक ग्लोबल डेस्टिनेशन” अवधारणा के तहत टिहरी क्षेत्र के लिए एक व्यापक और समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि टिहरी स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (TADA) इस परियोजना में डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DMO) के रूप में कार्य करेगी।

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बैठक में टिहरी झील क्षेत्र को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इनमें टिहरी झील रिंग रोड का निर्माण, आइकोनिक ब्रिज, ग्रीन वॉक-वे, एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस सेंटर, ईको पार्क और प्राकृतिक व्यू प्वाइंट विकसित करने की योजना शामिल है। मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा सकता है, लेकिन इसकी योजना समग्र रूप से तैयार की जानी चाहिए।

उन्होंने टिहरी तक एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी मजबूत करने, सड़कों के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही नए पर्यटन मार्गों की संभावनाएं तलाशने को भी कहा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के दौरान क्षेत्र की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य को किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दिया जाए। उन्होंने साइट-स्पेसिफिक निर्माण पर जोर देते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही।

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बैठक में टिहरी परियोजना में वॉटरड्रोम, वॉटरपोर्ट और सी-प्लेन संचालन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आइकोनिक पुलों का डिजाइन तैयार करते समय सी-प्लेन परियोजना को ध्यान में रखा जाए। इसके अलावा डोबरा-चांठी पुल के पास स्थित हेलीपैड को हेलीपोर्ट के रूप में विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़े सभी विभाग और संस्थाएं आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि टिहरी को एक विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सके।

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