पौड़ी। जनपद पौड़ी के कमंद गांव और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार के लगातार बढ़ते हमलों ने ग्रामीणों की जिंदगी को भय और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया है। बीते शुक्रवार को कमंद गांव में गुलदार के हमले में एक व्यक्ति की मौत के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई, जबकि अगले ही दिन पास के गांव में एक महिला पर भी गुलदार ने हमला कर दिया। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। गांव के आसपास कई गुलदारों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद लोगों ने रात के समय घरों से बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया है। खासकर छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर अभिभावकों में सबसे ज्यादा भय बना हुआ है। गांव में पर्याप्त वाहन सुविधा न होने के कारण कई अभिभावक स्वयं बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लाने को मजबूर हैं। प्रशासन ने एहतियातन कुछ दिनों के लिए गांव के विद्यालय बंद रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्कूल दोबारा खुलने के बाद भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार है।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं और उनका जीवन खेती-बाड़ी तथा बागवानी पर निर्भर है। ऐसे में उन्हें रोजाना खेतों और बगीचों तक जाना पड़ता है, जहां जंगली जानवरों के हमले का खतरा लगातार बना रहता है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कोई और ग्रामीण भी गुलदार का शिकार बन सकता है।

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गांव के लोगों का कहना है कि पहले शाम के समय बच्चे घरों के बाहर खेलते थे और ग्रामीण सड़कों पर टहलने निकलते थे, लेकिन लगातार दो हमलों के बाद अब पूरा माहौल बदल गया है। कई ग्रामीणों ने गुलदार को गांव की सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में घूमते हुए देखा है, जिससे लोगों में भय और अधिक बढ़ गया है।

घटनाओं के बाद वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। Uttarakhand Forest Department की टीम लगातार गांव में गश्त कर रही है। डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इलाके में सीसीटीवी कैमरे और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही विभाग का शूटर भी मौके पर तैनात किया गया है।

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वन विभाग के अनुसार, प्राथमिकता गुलदार को पिंजरे में कैद करने और ट्रेंकुलाइज करने की है। यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है तो अंतिम विकल्प के रूप में उसे मार गिराने की कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और सहयोग करने की अपील की है।

लोगों को रात के समय अकेले बाहर न निकलने, बच्चों को अकेला न छोड़ने और जंगल से सटे इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त, पिंजरे लगाने और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि गांव में फैले भय के माहौल को खत्म किया जा सके।

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