बदरीनाथ । उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भू-वैकुंठ धाम भगवान बदरीविशाल के कपाट आज वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। प्रातः 6:15 बजे के नियत शुभ मुहूर्त पर उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ के दिव्य सान्निध्य में द्वार पूजा और पंचांग पूजन संपन्न हुआ, जिसके उपरांत रावल जी ने नर पूजा की जिम्मेदारी संभालते हुए कपाट खोले।

इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित होने के बाद यह लगातार चौथी बार है जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी इस ऐतिहासिक समारोह की शोभा बढ़ा रहे हैं। भक्तों को आशीर्वाद देते हुए पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि अब आगामी छह माह तक समस्त सनातन धर्मावलंबी भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे। इस भव्य उद्घाटन समारोह में स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती, स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि, विजय कपरवाण और डॉ. बृजेश सती सहित भारी संख्या में देश-विदेश से आए श्रद्धालु मौजूद रहे, जिससे पूरा बदरीनाथ धाम ‘जय बदरीविशाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

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