देहरादून। उत्तराखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट ने गंभीर चिंता बढ़ा दी है। परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में सीखने के प्रतिफल (लर्निंग आउटकम) श्रेणी में राज्य का प्रदर्शन बेहद कमजोर दर्ज किया गया है। उत्तराखंड को इस श्रेणी में मात्र 67.4 अंक मिले हैं, जिसके साथ वह देश में 29वें स्थान पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की सीखने की क्षमता के मामले में उत्तराखंड कई राज्यों से पीछे रह गया है। चिंताजनक बात यह है कि बिहार, झारखंड और मणिपुर जैसे राज्यों का प्रदर्शन भी उत्तराखंड से बेहतर रहा। बिहार को 81.9, झारखंड को 69.3 और मणिपुर को 89.7 अंक प्राप्त हुए हैं।

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वहीं पड़ोसी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष राज्यों में जगह बनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और लगातार गिरता शैक्षणिक स्तर इसके प्रमुख कारण हैं।

शिक्षाविदों का कहना है कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए गए तो इसका सीधा असर राज्य के भविष्य और विकास पर पड़ेगा। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स राज्यों की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर करता है, जिसमें सीखने के प्रतिफल, बुनियादी ढांचा, शिक्षक प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है।

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