देहरादून :  उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण फ्री नहीं होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को एक न्यूनतम शुल्क चुकाना होगा। यह कदम मुख्य रूप से फर्जी पंजीकरणों को रोकने और वास्तविक यात्रियों की संख्या का सटीक आकलन करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

होटल संचालकों की लंबे समय से की जा रही मांग पर यह फैसला लिया गया है। कई यात्री ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद यात्रा पर नहीं पहुंचते, जिससे फर्जी रजिस्ट्रेशन की समस्या उत्पन्न होती है। इससे होटलों में ठहरने वाले वास्तविक यात्रियों को अक्सर पंजीकरण नहीं मिल पाता और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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गढ़वाल मंडल के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में गठित एक समिति शुल्क की राशि तय करेगी। सूत्रों के अनुसार, न्यूनतम 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक का शुल्क लग सकता है, हालांकि अंतिम राशि समिति की सिफारिश और शासन की मंजूरी के बाद तय होगी।

चार धाम यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलने के साथ यात्रा शुरू होगी, जबकि केदारनाथ धाम 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम 23 अप्रैल को खुलेंगे। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया इसी सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पंजीकरण अनिवार्य रहेगा, लेकिन यात्रियों की कुल संख्या पर कोई सीमा नहीं लगाई जाएगी।

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ट्रांजिट कैंप में आयोजित बैठक में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने होटल एसोसिएशन, टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन तथा अन्य हितधारकों से चर्चा की। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पंजीकरण प्रक्रिया को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा। होटल बुकिंग पहले से कराने वाले यात्रियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह बदलाव चार धाम यात्रा में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और स्थानीय व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पिछले वर्षों में लाखों श्रद्धालु चार धाम पहुंचे थे, और इस बार भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है।

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सरकार का मानना है कि शुल्क लगाने से फर्जीवाड़ा रुकेगा और यात्रा अधिक सुचारू रूप से संचालित होगी। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से पंजीकरण कराएं तथा किसी तीसरे पक्ष से फीस के नाम पर ठगे जाने से बचें।

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