नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर के अपने अनुमान को संशोधित कर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले दिसंबर में केंद्रीय बैंक ने इस वित्त वर्ष के लिए विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। यह ऊपर की ओर संशोधन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार और सकारात्मक गति को दर्शाता है, भले ही वैश्विक चुनौतियां बनी हुई हैं।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज यहां मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और सुधार की राह पर है। उन्होंने बताया कि वास्तविक जीडीपी इस वर्ष पिछले साल की तुलना में काफी अधिक 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की स्थिति में है। सेवा क्षेत्र के मजबूत योगदान और विनिर्माण में आई रिकवरी के कारण वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

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मल्होत्रा ने आगे कहा कि हाल ही में केंद्रीय बजट 2026 में घोषित कई उपाय आर्थिक वृद्धि को मजबूती प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद सेवा क्षेत्र का निर्यात मजबूत बना रहेगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण समर्थन बनेगा।

यह संशोधन आरबीआई के आकलन में आए सकारात्मक बदलाव को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों में सुधार और सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती का परिणाम है। हालांकि, वैश्विक व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं और अन्य बाहरी जोखिम बने हुए हैं।

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एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है, जिससे ऋणों की ईएमआई में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। नीति की दिशा ‘न्यूट्रल’ बनी हुई है, जो विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाने पर जोर देती है।

यह बढ़ोतरी आरबीआई के रुख में संभावित पुनर्मूल्यांकन का संकेत है, जहां मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को और समर्थन दिया जा सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले महीनों में डेटा के आधार पर आगे की नीतियां तय होंगी।

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